पालघर। महाराष्ट्र के पालघर (Palghar, Maharashtra) जिले में सात वर्षीय बेटी का यौन शोषण (Sexual Exploitation) करने के मामले में अदालत ने उसके पिता को 20 साल की सश्रम कारावास (Rigorous imprisonment) की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। विशेष न्यायाधीश एएच काशिकर ने 5 अक्टूबर को यह फैसला सुनाया। फैसले की प्रति शुक्रवार को उपलब्ध कराई गई।
मामला वसई पश्चिम का है, जहां 3 नवंबर 2020 को एक आवासीय सोसायटी में रहने वाली सात वर्षीय बच्ची की मदद के लिए पड़ोसियों ने एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) से संपर्क किया था। बच्ची देर रात रो रही थी और चिल्ला रही थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस और एनजीओ की टीम मौके पर पहुंची और बच्ची को बचाया। इसके बाद उसके पिता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी की मुलाकात डेनमार्क में एक महिला से हुई थी। दोनों ने शादी कर ली और वहीं उनकी बेटी का जन्म हुआ। बाद में पति-पत्नी ने अलग होने का फैसला किया। तलाक की प्रक्रिया के दौरान आरोपी भारत लौट आया, जबकि बच्ची अपनी मां के साथ डेनमार्क में रह रही थी। इसके बाद आरोपी ने बेटी की कस्टडी हासिल कर ली और उसे वसई ले आया।
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष सरकारी वकील जयप्रकाश पाटिल ने अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाह पेश किए। गवाहों के बयानों और अन्य साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।
न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी ने पिता के रूप में बच्ची को मिले भरोसे का दुरुपयोग किया और लंबे समय तक उसका यौन शोषण किया।
अदालत ने यह भी गौर किया कि बच्ची ने स्पष्ट रूप से बताया था कि उसके पिता के अलावा किसी अन्य व्यक्ति ने उसके निजी अंगों को नहीं छुआ था। गवाहों ने भी बताया कि बच्ची आरोपी के साथ अकेले रहती थी। सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि बच्ची को अंग्रेजी और स्थानीय भाषाओं का ज्ञान नहीं था।
अदालत ने गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद आरोपी को पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी माना। इसके बाद उसे 20 साल की सश्रम कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
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