
इंदौर। 300 करोड़ रुपए की लागत से नेशनल हाईवे अथॉरिटी द्वारा 26 किलोमीटर लम्बा इंदौर-बैतूल फोरलेन बनाया जा रहा है और इसे जल संरक्षण का रोल मॉडल बनाने का दावा भी सांसद द्वारा किया गया है, जिसके चलते हाईवे के किनारे 5 बड़े तालाब तैयार किए गए हैं, जो 100 बीघा से ज्यादा क्षेत्र में पानी रोकेंगे और इससे भू-जल स्तर बढ़ेगा और आसपास के किसानों को इसका दीर्घकालिक लाभ होग।
इंदौर-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग देश का पहला ‘जल संरक्षण आधारित हाईवे’ बनने जा रहा है। 12 साल के विकास पर्व के तहत साँवेर विधानसभा क्षेत्र में इस हाईवे का निरीक्षण करते हुए सांसद शंकर लालवानी ने इसे सडक़ से ज्यादा ‘राष्ट्रीय आदर्श मॉडल’ करार दिया। लगभग 300 करोड़ की लागत से बन रहे इस 26 किमी लंबे मार्ग की खासियत इसका वैज्ञानिक जल प्रबंधन है। सांसद लालवानी के मुताबिक, सडक़ के दोनों ओर जल निकासी तंत्र, रिचार्ज पॉइंट और स्टॉर्म वॉटर चेंबर बनाए गए हैं ताकि बारिश की एक-एक बूंद भू-जल में समा जाए। इसके लिए हाईवे के किनारे 5 बड़े तालाब भी तैयार किए गए हैं, जो 100 बीघा से ज्यादा क्षेत्र में पानी रोकेंगे।
इससे न सिर्फ भू-जल स्तर बढ़ेगा, बल्कि आसपास के किसानों को भी दीर्घकालिक फायदा मिलेगा। लालवानी ने बताया कि प्रोजेक्ट बनते समय उन्होंने खुद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सामने पहाडिय़ों और जल संरक्षण का प्रस्ताव रखा था। गडकरी जी ने इसे तुरंत मंजूरी देकर अधिकारियों को शामिल करने के निर्देश दिए। आज वही सोच इस हाईवे की पहचान बन रही है।
ग्रामीणों की सुविधा के लिए दोनों तरफ सर्विस रोड, 12 बड़े अंडरपास और 100 फीट चौड़े रास्ते बनाए गए हैं। 6 बड़े पुल और 25 से अधिक पुलियों से आवागमन सुगम होगा। सब कुछ भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। सांसद ने कहा कि 2014 में देश में 91 हजार किमी हाईवे थे, आज 1.47 लाख किमी से ज्यादा हैं। यह मोदी सरकार के ‘विकास और विश्वास’ का सबूत है। इंदौर-बैतूल हाईवे पूरा होते ही मालवा क्षेत्र के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास का नया द्वार खुलेगा।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved