
इंदौर। इंदौर के शिशु कुंज इंटरनेशनल स्कूल (Shishu Kunj International School) में पूर्व में विद्यार्थियों के अस्वस्थ होने की गंभीर घटना के बाद खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। विद्यालय प्रबंधन द्वारा सभी आवश्यक सुधार और सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद, प्रशासन ने स्कूल के भोजन कक्ष (Mess/Kitchen) को सशर्त रूप से पुनः संचालित करने की अनुमति प्रदान कर दी है। इस फैसले से विद्यार्थियों और अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।
पेयजल में मिले थे हानिकारक जीवाणु, बंद कराया गया था किचन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिशु कुंज इंटरनेशनल स्कूल में कुछ समय पूर्व विद्यार्थियों के अचानक अस्वस्थ होने की घटना सामने आई थी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने विद्यालय परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया था। प्रारंभिक जांच और परीक्षण प्रतिवेदनों से यह बात सामने आई थी कि बच्चों के बीमार होने की मुख्य वजह भोजन निर्माण में उपयोग किए जा रहे पानी में हानिकारक जीवाणुओं—विशेषकर ई. कोलाई (E. coli) और कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया (Coliform Bacteria) की मौजूदगी थी।
स्थिति की नजाकत को देखते हुए एहतियातन तौर पर विद्यालय के भोजन कक्ष का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया गया था और खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने प्रबंधन को नोटिस जारी कर सभी कमियों को दूर करने के सख्त निर्देश दिए थे।
संयुक्त दल ने किया भौतिक सत्यापन, जल परीक्षण रिपोर्ट आई पॉजिटिव
निर्धारित अवधि के भीतर विद्यालय प्रबंधन ने खाद्य सुरक्षा प्रशासन को एक विस्तृत अनुपालन प्रतिवेदन (Compliance Report) सौंपा, जिसमें सभी कमियों को सुधारने का दावा किया गया था। इस दावे की सत्यता की जांच के लिए कलेक्टर श्री शिवम वर्मा के निर्देशानुसार एक संयुक्त दल का गठन किया गया। इस दल में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के साथ-साथ चिकित्सक और पालक-शिक्षक संघ (PTA) के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
संयुक्त दल ने गत 20 जुलाई 2026 को विद्यालय पहुंचकर प्रत्येक बिंदु का बारीकी से भौतिक सत्यापन किया। इसके अलावा, NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला के प्रतिनिधियों के माध्यम से विद्यालय के पेयजल के नए नमूने लेकर उनकी पुनः जांच कराई गई। राहत की बात यह रही कि विद्यालय द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट और स्वतंत्र परीक्षण—दोनों में ही पेयजल पूरी तरह सुरक्षित पाया गया और उसमें किसी भी प्रकार के हानिकारक जीवाणु (E. coli या Coliform) की पुष्टि नहीं हुई।
कड़ी शर्तों के साथ मेस संचालन की अनुमति
जल परीक्षण रिपोर्ट संतोषजनक मिलने और सभी सुरक्षा मानकों के धरातल पर खरे उतरने के बाद, खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने आज 30 जुलाई 2026 को विद्यालय के भोजन कक्ष को पुनः शुरू करने की अनुमति दे दी। हालांकि, प्रशासन ने प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि भविष्य में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (FSSA 2006) के नियमों का अक्षरशः पालन करना होगा।
प्रशासन द्वारा तय की गई प्रमुख शर्ते
मेस और किचन परिसर में शत-प्रतिशत स्वच्छता बनाए रखना।
केवल उच्च गुणवत्तायुक्त और शुद्ध पेयजल का उपयोग करना।
खाना बनाने वाले कर्मचारियों (फूड हैंडलर्स) की नियमित मेडिकल फिटनेस जांच।
समय-समय पर पेस्ट कंट्रोल और खाद्य पदार्थों का वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित भंडारण।
पानी की गुणवत्ता और स्वास्थ्य मानकों के अभिलेखों को हमेशा अद्यतन रखना।
बंद अवधि का भोजन शुल्क नहीं वसूलेगा प्रबंधन
निरीक्षण के दौरान अभिभावकों ने जिला प्रशासन के समक्ष यह प्रमुख मांग रखी थी कि जिस समयावधि में भोजन कक्ष बंद रहने के कारण बच्चों को भोजन उपलब्ध नहीं कराया गया, उसका शुल्क छात्रों से न वसूला जाए। प्रशासन ने अभिभावकों की इस जायज मांग पर संज्ञान लेते हुए विद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिए। इसके अनुपालन में प्रबंधन ने पूरी सहमति जताते हुए यह घोषणा की है कि मेस बंद रहने की अवधि का भोजन शुल्क विद्यार्थियों से नहीं लिया जाएगा और इसकी आधिकारिक सूचना सभी अभिभावकों को दे दी जाएगी।
स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं: कलेक्टर शिवम वर्मा
इस पूरे मामले पर जिला कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और उनकी खाद्य सुरक्षा से किसी भी स्तर पर खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि जिले के अन्य विद्यालयों, हॉستलों और शिक्षण संस्थानों के मेस का औचक और नियमित निरीक्षण आगे भी जारी रहेगा। यदि भविष्य में किसी भी संस्थान में नियमों या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधितों के खिलाफ कानून के तहत बेहद कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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