img-fluid

3 साल तक लड़ा केस, अब इस बड़ी जूता कंपनी को देने पड़े 800 गुना पैसे

June 18, 2026

रोहतक: हरियाणा के रोहतक में एक कस्टमर से कैरी बैग के 10 रुपये लेना एक कंपनी को भारी पड़ गया. तीन साल तक लंबी लड़ाई के बाद उपभोक्ता फोर ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया है. जिला उपभोक्ता विवाद आयोग ने फुटवियर कंपनी रेड टेप को ग्राहक से वसूले गए 10 रुपये वापस करने के साथ-साथ 8 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है. आयोग ने कैरी बैग के लिए अलग से शुल्क वसूलने को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार करार दिया है.

मामला साल 2023 का है. रोहतक के एक 27 वर्षीय ग्राहक ने रेड टेप के आउटलेट से 2,069.70 रुपये के जूते खरीदे थे. खरीदारी के दौरान कंपनी ने उनसे कैरी बैग के लिए अतिरिक्त 10 रुपये वसूले. ग्राहक ने स्टाफ से मुफ्त कैरी बैग देने की मांग की, लेकिन उसे यह कहते हुए मना कर दिया गया कि कंपनी की नीति के अनुसार बैग के लिए अलग से भुगतान करना होगा.

इसके बाद ग्राहक ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया और कंपनी पर गैरकानूनी तरीके से शुल्क वसूलने का आरोप लगाया. शिकायत में कहा गया कि इस वजह से उसे मानसिक परेशानी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा.


  • कंज्यूमर कमीशन के अध्यक्ष नागेंद्र सिंह कादियान और सदस्य तृप्ति पन्नू और डॉ. विजेंद्र सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि कंपनी का रवैया उपभोक्ता हितों के खिलाफ था. आयोग ने 12 जून को दिए अपने आदेश में कहा कि कैरी बैग के लिए अलग से 10 रुपये वसूलना सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है.

    रिपोर्ट के अनुसार सुनवाई के दौरान रेड टेप की ओर से यह तर्क दिया गया कि कैरी बैग के लिए शुल्क लेने का उद्देश्य ग्राहकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था और उन्हें अपने बैग साथ लाने के लिए प्रेरित करना था. कंपनी ने यह भी कहा कि कैरी बैग खरीदना ग्राहकों के लिए अनिवार्य नहीं था और उन्हें अपने बैग लाने से कभी नहीं रोका गया.

    आयोग ने कंपनी की दलीलों को नहीं माना. आयोग ने माना कि सामान बेचने वाले प्रतिष्ठानों की जिम्मेदारी है कि वे खरीदे गए उत्पाद को ग्राहक को उचित स्थिति में उपलब्ध कराएं. इसलिए कैरी बैग के लिए अलग से शुल्क लेना उचित नहीं माना जा सकता.

    आयोग ने रेड टेप को ग्राहक के 10 रुपये लौटाने के साथ सेवा में कमी के लिए 4 हजार रुपये मुआवजा और 4 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में 30 दिनों के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए. यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. आयोग के इस निर्णय ने साफ कर दिया है कि रकम छोटी हो या बड़ी, यदि उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन होता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

    Share:

  • USPACOM से हटा 'Indo' नाम, कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

    Thu Jun 18 , 2026
    नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन लगातार कुछ न कुछ करता ही रहता है. इसी फेहरिस्त में कुछ नई चीजें भी शामिल की गई हैं. ट्रंप प्रशासन ने रक्षा विभाग का नाम बदलकर युद्ध विभाग (Department of War) करने का फैसला ले लिया. इसी तरह US इंडो-पैसिफिक कमांड (US Indo-Pacific Command) […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved