
गठित की गई 25 विशेष अदालतों में 23 नई अदालतें महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में स्थापित की गई हैं। वहीं, औरंगाबाद और नागपुर की दो विशेष अदालतों की घोषणा पहले ही 24 जुलाई को की जा चुकी थी। इन अदालतों में पेपर लीक, परीक्षा में धोखाधड़ी और अन्य अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी।
विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें मुख्य रूप से तीन कानूनों के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करेंगी—
इन कानूनों के तहत दर्ज मामलों का तेजी से निपटारा करने पर विशेष जोर रहेगा।
बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा जारी सूची के अनुसार, राज्य के कई जिलों में न्यायिक अधिकारियों को विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इनमें मुंबई (सिटी सिविल कोर्ट और विक्रोली), पुणे, ठाणे, नासिक, कोल्हापुर, बीड़, चंद्रपुर, धुले, गढ़चिरौली, गोंदिया, जलगांव, जालना, उस्मानाबाद, परभणी, सांगली, सातारा, सोलापुर, वर्धा, यवतमाल, वाशिम और नंदुरबार सहित कई जिले शामिल हैं।
पुणे में भ्रष्टाचार निवारण अदालत की प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट यू. एस. एम. अल अमूदी तथा पिंपरी-चिंचवड़ के संयुक्त सिविल जज आर. आर. शेरेकर को विशेष अदालतों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वहीं, मुंबई सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट के न्यायाधीश ए. ए. नंदगांवकर और विक्रोली कोर्ट की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पी. वी. हिंगणे को भी विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों का प्रभार दिया गया है।
इन विशेष अदालतों के गठन का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों से जुड़े मामलों का शीघ्र निपटारा करना, दोषियों के खिलाफ त्वरित न्यायिक कार्रवाई सुनिश्चित करना तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत करना है।
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