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अक्टूबर से इंदौर की 7.50 लाख संपत्ति का शुरू होगा जीआईएस सर्वे

September 15, 2026

  • सर्वे करने वाली एजेंसी की जानकारी सीधे सरकार के सतत ऐप पर ड होगी
  • निगम ने एमपीईडीसी को चुकाए 6 लाख
  • सर्वे के बाद सीधे संपत्ति मालिक के नाम ऐप से ही जारी होगा नोटिस
  • निगम के राजस्व विभाग के कर्मचारियों के भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम

इंदौर। नगर निगम द्वारा निजी क्षेत्र की एजेंसी के माध्यम से इंदौर की 7.5 लाख प्रॉपर्टी का जीआईएस सर्वे अगले माह अक्टूबर में शुरू किया जाएगा। यह सर्वे राज्य सरकार के सतत ऐप से जुड़ा हुआ होगा। इसके लिए इंदौर नगर निगम के द्वारा एमपीईडीसी को 6 लाख भी चुकाए गए हैं। जिस व्यक्ति की संपत्ति का सर्वे हो जाएगा, उसके नाम पर यह ऐप ही ऑटोमैटिक नोटिस जारी कर देगा। इस बार इस सर्वे में नगर निगम द्वारा राजस्व विभाग के कर्मचारियों के भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की व्यवस्था कर दी गई है।

निगम के राजस्व विभाग के माध्यम से संपत्ति कर की चोरी को पकड़ने और नागरिकों से उनकी संपत्ति के हिसाब से टैक्स लेने के लिए काफी समय से कोशिश की जा रही है। इस कोशिश में अब एक बार फिर नगर निगम द्वारा जीआईएस सर्वे शुरू कराया जा रहा है। इसके लिए निगम ने टेंडर के माध्यम से सर्वे करने वाली एजेंसी का चयन कर लिया है। इस एजेंसी के साथ निगम का एग्रीमेंट भी हो गया है। निगम के राजस्व विभाग के अपर आयुक्त आकाश सिंह ने बताया कि अगले महीने अक्टूबर से इस एजेंसी द्वारा इंदौर शहर में स्थित 7.50 लाख प्रॉपर्टी का सर्वे शुरू कर दिया जाएगा। इस एजेंसी द्वारा जब भी जो भी सर्वे किया जाएगा, उसकी जानकारी को सीधे मध्य प्रदेश सरकार के नगरीय प्रशासन विभाग के सतत ऐप पर डाला जाएगा।


  • उन्होंने बताया कि जैसे ही कंपनी की टीम जाकर किसी संपत्ति पर सर्वे करेगी तो उस सर्वे के डाटा को इस ऐप पर डाल दिया जाएगा। इसके बाद नगर निगम के संबंध जोनल कार्यालय की टीम द्वारा जाकर मौके पर जांच करते हुए सर्वे टीम के रिजल्ट का परीक्षण किया जाएगा और अपनी जानकारी को इसी सतत ऐप पर डाल दिया जाएगा। जब यह क्रॉस एग्जामिनेशन हो जाएगा तो उसके बाद में इस ऐप के माध्यम से संबंधित व्यक्ति के नाम पर नोटिस जारी किया जाएगा। इस नोटिस में बताया जाएगा कि उस व्यक्ति की कौन से स्थान पर स्थित कौन सी संपत्ति का सर्वे किया गया है और उस सर्वे का क्या परिणाम रहा है। इसके साथ ही संबंधित व्यक्ति को यह भी बताया जाएगा कि अब तक उसके द्वारा इस संपत्ति में कितने निर्मित क्षेत्र का किस रेट से संपत्ति कर दिया जा रहा था। हकीकत में इस संपत्ति का निर्माता क्षेत्र जांच में कितना पाया गया है और उसमें किस रेट से कितना संपत्ति कर लगाया जाएगा। इस मामले में सतत ऐप पर उचित प्रावधान करने के लिए इंदौर नगर निगम के द्वारा मध्यप्रदेश इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन से आग्रह किया गया। इस प्रकार कॉरपोरेशन द्वारा नगर निगम को यह जवाब दिया गया कि निगम के जीआईएस सर्वे को इस ऐप पर लेने के लिए हमें कुछ सुधार करना होंगे। इस कार्य के लिए नगर निगम से 6 लाख रुपए का शुल्क मांगा गया। निगम द्वारा यह शुल्क इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को दे दिया गया है। अब कारपोरेशन द्वारा अपने इस ऐप पर अगले 10 दिन में नगर निगम के सर्वे की जानकारी को दर्ज करने की व्यवस्था कर दी जाएगी।

    अपील का मिलेगा अवसर
    जब नागरिक के पास सतत ऐप द्वारा जारी किया गया नोटिस पहुंचेगा तो उसके बाद में संबंधित व्यक्ति के पास यह अवसर होगा कि वह सर्वे एजेंसी की जानकारी को चुनौती देते हुए अपील कर सकता है। यदि किसी संपत्ति मालिक द्वारा अपील की जाती है तो उस अपील को भी सतत ऐप पर दर्ज किया जाएगा। इसके बाद में निगम के संबंधित जोनल कार्यालय के सहायक राजस्व अधिकारी या फिर निगम मुख्यालय के उपायुक्त अथवा राजस्व विभाग के अपर आयुक्त द्वारा इस अपील की सुनवाई की जाएगी। इस सुनवाई की जानकारी को भी ऐप पर दर्ज किया जाएगा। इस सुनवाई में संबंधित व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज भी इस ऐप पर डाले जाएंगे। इस सुनवाई के बाद अंतिम फैसला भी इस ऐप पर ही दर्ज किया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति द्वारा सर्वे एजेंसी के सर्वे रिपोर्ट पर कोई आपत्ति नहीं ली जाती है तो सीधा ऐप के माध्यम से ई नगर पालिका के पोर्टल पर उस संपत्ति की जानकारी में संशोधन हो जाएगा। यदि आपत्ति ली गई तो आपत्ति का निराकरण करने के बाद ई नगर पालिका के पोर्टल पर संशोधन कर संपत्ति करके गणना संशोधित जानकारी के आधार पर की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को इस तरह से रखा गया है कि इसमें नगर निगम के राजस्व विभाग के कर्मचारी भ्रष्टाचार नहीं कर सकें और पारदर्शी तरीके से इस सर्वेक्षण के माध्यम से निगम की कमाई बढ़ाने और कर चोरी पकड़ने का काम किया जा सके।

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