आचंलिक

जीवन काल में पहली बार खुद के अंतर्मन को देखने का मौका मिला : कशिश रघुवंशी

  • पांच दिवसीय आत्म पोषण शिविर का समापन

सिरोंज। नगर के कुरवाई रोड पर स्थित निजी में आयोजित पांच दिवसीय आत्म पोषण शिविर का समापन किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के अलावा झारखंड, दिल्ली, व अन्य प्रदेशों से आए मास्टर ट्रेनरो का रक्षिता परिवार द्वारा साल श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजेश पटेल ने बताया कि यह पांच दिवसीय आयोजन विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागियों के लिए तैयार किया गया था। प्रथम और अंतिम चरण का आयोजन महिला वर्ग एवं द्वितीय एवं तृतीय चरण विशेष युवा वर्ग के लिए आयोजित किया गया। इस पूरे आयोजन में 400 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

नैतिक भारत के संकल्प को लेकर शुरू की गई है यात्रा
लखनऊ उत्तर प्रदेश से आए मास्टर ट्रेनर हिमांशु भारत ने बताया कि एक नैतिक भारत बनाने के उद्देश्य को लेकर हम सभी संकल्पित हैं और इसी उद्देश्य को लेकर इनीशिएटिव ऑफ चेंज महाराष्ट्र पंचगनी से यह यात्रा शुरू हुई है जो पूरे भारत भ्रमण के लिए निकली है। हमारा उद्देश्य की एक भ्रष्टाचार मुक्त नशा मुक्त हिंसा मुक्त नैतिक भारत का निर्माण हो और यह तभी संभव है पहले हम स्वयं को बदलें और फिर परिवार समाज और देश को बदलें इसी विचारधारा को लेकर यह विशेष आयोजन किया गया।


खुद मैं परिवर्तन फिर देश मैं परिवर्तन संभव है
हिमांशु भारत ने कहा कि खुद में बदलाव लाना इतना आसान नहीं है उन्होंने चार नैतिक मूल्यों को जीवन में उतार लेने की बात कही संपूर्ण पवित्रता, संपूर्ण इमानदारी, संपूर्ण प्रेम, संपूर्ण निस्वार्थ इन चार नैतिक मूल्यों पर जीवन जीना ही हमारा उद्देश है। जब हम स्वयं भी इन चार मूल्यों पर अपना जीवन जीते हैं तो श्वेता ही अपने जीवन में बदलाव होता है धीरे-धीरे समाज और फिर देश में परिवर्तन लाना संभव है उन्होंने विभिन्न टूल्स के माध्यम से अपने अनुभव साझा करते हुए युवाओं को एक नैतिक भारत बनाने का संकल्प दिलाया।

कहीं और नहीं अंतर्मन को झाकने से मिलता है शांति का रास्ता
झारखंड से आए परिवर्तन की पहल ट्रस्टी विप्लव महतो ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा की। मन के रास्ते पर विचारों का ट्रैफिक जब बहुत बढ़ जाता है तो उसके शोरगुल से हम अशांत हो जाते हैं। प्रति मिनट गुजरने वाले विचारों की गिनती यदि कम हो जाए तो हमारी अशांति में कमी होती है। प्राय: कम अशांति को ही लोग शांति समझ लेते हैं। थोड़ी सी भूल हो जाती है। वास्तविक शांति तब घटित होती है जब मन का रास्ता बिल्कुल सूना हो जाता है। कोई विचार नहीं निकलता। उस सुनसान में सन्नाटे जैसी आवाज सुनाई देती है। और यह शांति का सीधा रास्ता किसी पुस्तक, किसी मशीन से नहीं बल्कि खुद को सुनने और अंतर्मन को झाकने से ही मिलेगा।

परिस्थितियों में धैर्य नहीं खोना चाहिए
गोरखपुर उत्तर प्रदेश से आई मास्टर ट्रेनर राधा गिरी ने जीवन का लेखा-जोखा टूल्स पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जीवन में उतार चढ़ाव तो हमेशा ही आते रहते है। धूप के बाद छाँव और दुख के बाद सुख यही जीवन का सार है। हमे इस बात को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए कि जीवन मे कोई भी चीज़ हमेशा एक समान नही रहती हैं। वक़्त के साथ सब कुछ बदलता है। किसी भी परिस्थिति में धैर्य नहीं खोना चाहिए। क्योंकि अगर आज आपके ऊपर दुखो का पहाड़ टूटा है तो भी ये वक्त चला जायेगा और अगर आज आप किसी चीज को लेकर बहुत खुश हैं, तो भी ये वक्त गुजऱ जाएगा। इसलिए हमेशा खुद को एकसमान रखने की कोशिश करें। जि़न्दगीं में कभी हार ना मानें, बस चलते रहे और अडिग होकर जीवन की राह में कदम बढ़ाते रहे। कार्यक्रम के दौरान गोरखपुर उत्तर प्रदेश से राधा गोस्वामी शिवपुरी से प्रीति तिवारी, प्रमोद रावत भोपाल से वंदना श्रीवास्तव विदिशा से संजय श्रीवास्तव आदि मास्टर ट्रेनरो ने कार्यक्रम में अपने अनुभव साझा किए समापन अवसर पर समस्त प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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