मुंबई। महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive examinations in Maharashtra) की विश्वसनीयता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच अब राजनीतिक गलियारों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। मामले के तार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री नरहरी जिरवाल के कार्यालय से जुड़ने के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।
मराठी अखबार ‘लोकसत्ता’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्री कार्यालय में तैनात स्पेशल एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (OSD) गणेश देवरे की भूमिका जांच के घेरे में आई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देवरे पेपर लीक मामले के एक प्रमुख आरोपी के नंदुरबार स्थित मकान में किराएदार के तौर पर रह रहे थे।
पेपर लीक सामने आने के बाद से OSD गायब
रिपोर्ट के मुताबिक, मामले का खुलासा होने के बाद गणेश देवरे मंत्रालय स्थित अपने कार्यालय से नदारद हैं। हालांकि मंत्री के निजी सचिव का कहना है कि देवरे पिछले करीब एक महीने से कार्यालय नहीं आ रहे थे।
उनके अचानक कार्यालय से अनुपस्थित रहने की खबर ने जांच एजेंसियों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी से उनके संबंध किस तरह के थे और क्या उनका पेपर लीक नेटवर्क से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क था।
नियुक्ति को लेकर भी उठे सवाल
गणेश देवरे को लेकर सिर्फ पेपर लीक मामले में ही सवाल नहीं उठ रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उनकी नियुक्ति निर्धारित सरकारी प्रक्रिया और नियमों के अनुरूप नहीं हुई थी। इसके बावजूद वह लंबे समय तक मंत्री कार्यालय के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे।
बताया जा रहा है कि 25 अगस्त को जारी सरकारी आदेश के जरिए उन्हें पद से हटाए जाने की कार्रवाई भी की गई है। हालांकि, पेपर लीक मामले में उनकी वास्तविक भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
पहले भी विवादों में रहा है मंत्री का दफ्तर
नरहरी जिरवाल का कार्यालय इससे पहले भी भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण चर्चा में आ चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब चार महीने पहले मंत्रालय परिसर में ही जिरवाल के कार्यालय से जुड़े एक क्लर्क को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था।
अब उसी कार्यालय में तैनात एक OSD का नाम MPSC पेपर लीक जांच से जुड़ने के बाद मंत्री कार्यालय की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
कैसे हुआ था MPSC पेपर लीक का खुलासा?
मामला 22 मार्च को आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर ग्रुप-B की ऑफलाइन भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा से पहले सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप ग्रुपों पर प्रश्नपत्र लीक होने के दावे सामने आए थे।
आरोप था कि परीक्षा से करीब दो दिन पहले लगभग 90 प्रश्नों और उनके उत्तरों को कथित तौर पर व्हाट्सऐप ग्रुपों में साझा किया गया और उम्मीदवारों से इसके लिए करीब 12-12 लाख रुपये तक लिए गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपी गई। शुरुआती जांच में कथित पेपर लीक से कुछ उम्मीदवारों को फायदा पहुंचने की बात सामने आने के बाद MPSC ने परीक्षा रद्द कर दी।
MPSC के अधिकारियों समेत कई गिरफ्तार
जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें MPSC के अंडर सेक्रेटरी अभिजीत लेंदवे, असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर गोपाल मराठे और विश्वेश्वर नकट जैसे अधिकारियों के नाम सामने आए।
इसके अलावा कथित तौर पर लीक पेपर उम्मीदवारों तक पहुंचाने वाले निजी कोचिंग क्लास संचालक प्रवीण पाटिल और अन्य बिचौलियों को भी गिरफ्तार किया गया है। मामले में एक महिला उम्मीदवार का नाम भी जांच के दौरान सामने आया, जिसने कथित तौर पर परीक्षा में शीर्ष रैंक हासिल की थी।
अब जांच का दायरा और बढ़ा
MPSC पेपर लीक केस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें प्रशासनिक अधिकारियों और कथित बिचौलियों के बीच संपर्क की परतें खुल रही हैं। अब मंत्री के कार्यालय में तैनात OSD का नाम सामने आने से जांच का दायरा और संवेदनशील हो गया है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि गणेश देवरे का पेपर लीक के आरोपी से क्या संबंध था और क्या उन्हें पूरे नेटवर्क की जानकारी थी? इसका जवाब पुलिस जांच और सामने आने वाले डिजिटल व अन्य सबूतों से ही मिल सकेगा।
इस मामले में आगे महाराष्ट्र सरकार और जांच एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं, इस पर सबकी नजर है। हालांकि, किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोप या जांच के दायरे में होने तक ही मानी जाएगी।
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