
नई दिल्ली। इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने दक्षिणी लेबनान (Southern Lebanon) में हिज्बुल्लाह (Hezbollah) के एक बड़े भूमिगत ठिकाने का खुलासा किया है। माजदल जौन गांव के नीचे स्थित इस सुरंग (Tunnel) की लंबाई करीब 200 मीटर और गहराई 29 मीटर बताई गई है। सेना के अनुसार सुरंग के भीतर इजरायल की दिशा में बनाए गए लॉन्च शाफ्ट, रहने की सुविधाएं, बड़ी मात्रा में हथियार, एंटी-टैंक मिसाइलें और 50 ईरानी निर्मित विस्फोटक ड्रोन बरामद किए गए हैं। यह कार्रवाई 2026 के युद्धविराम के दौरान चलाए जा रहे सुरक्षा अभियान का हिस्सा थी।
IDF की 551वीं ब्रिगेड और विशेष याहलोम यूनिट ने पिछले सप्ताह क्षेत्र में अभियान चलाया। इस दौरान 20 से अधिक हिज्बुल्लाह लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया। सेना ने सुरंग के आसपास मौजूद कई अन्य ठिकानों को भी ध्वस्त कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, सुरंग के अंदर रखा गया हथियारों का जखीरा संभावित हमलों के लिए तैयार अवस्था में था।
सेना का कहना है कि यह सुरंग पिछले एक दशक में ईरानी सहयोग और वित्तीय सहायता से विकसित की गई थी। इसे आबादी वाले इलाके के नीचे बनाया गया था और इसका नेटवर्क गांव की मस्जिद के आसपास के हिस्सों से भी जुड़ा हुआ था। इजरायल का आरोप है कि हिज्बुल्लाह ने नागरिक क्षेत्रों का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों को छिपाने के लिए किया।
हमले की तैयारी का केंद्र बनी सुरंग
अधिकारियों के अनुसार सुरंग केवल आवाजाही के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक संचालन करने के उद्देश्य से तैयार की गई थी। अंदर रहने की व्यवस्था, हथियार भंडारण और लॉन्चिंग सुविधाएं मौजूद थीं। इजरायल की ओर मुख किए गए लॉन्च शाफ्ट इस बात का संकेत देते हैं कि यहां से रॉकेट और मिसाइल हमले किए जा सकते थे। बरामद 50 ईरानी ड्रोन और एंटी-टैंक मिसाइलों को संभावित बड़े हमले की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान लंबे समय से हिज्बुल्लाह को सैन्य और आर्थिक समर्थन देता रहा है। उनका कहना है कि इस तरह की सुरंगें और हथियारों का नेटवर्क क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।
नागरिक इलाकों के नीचे मिला हथियारों का जखीरा
इजरायली सेना के अनुसार सुरंग ऐसे क्षेत्र के नीचे बनाई गई थी जहां सामान्य नागरिक रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे थे। सेना ने दावा किया कि कई सुरंगें स्कूलों, अस्पतालों और धार्मिक स्थलों के नजदीक स्थित थीं। अभियान के दौरान जारी वीडियो में सुरंग के भीतर हथियार, ड्रोन और रहने की सुविधाएं दिखाई गई हैं।
इजरायल का आरोप है कि हिज्बुल्लाह युद्धविराम के दौरान अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने में जुटा था। दूसरी ओर, लेबनान की ओर से कहा जाता रहा है कि इजरायली सैन्य कार्रवाइयों का असर स्थानीय आबादी पर पड़ता है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में जारी संघर्षविराम की मजबूती और भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
IDF ने स्पष्ट किया है कि दक्षिणी लेबनान में तलाशी और निगरानी अभियान आगे भी जारी रहेंगे। सेना का उद्देश्य सीमा के आसपास मौजूद सभी संभावित सुरंगों और ठिकानों की पहचान कर उन्हें निष्क्रिय करना है। इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, याहलोम यूनिट जैसी विशेष इकाइयां जटिल भूमिगत संरचनाओं का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में विशेषज्ञता रखती हैं।
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