
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि (Sri Krishna Birthplace) की मुक्ति को लेकर रविवार को मथुरा (Mathura) के राधाकुंड क्षेत्र स्थित चित्रगुप्त पीठ में साधु-संतों ने बड़ा ऐलान किया। मुंबई, हरिद्वार सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे संतों ने हवन-पूजन के बाद शंखनाद किया और श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर कारसेवा (karseva) के लिए 6 दिसंबर की तारीख घोषित की। संतों ने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश (CJI) को ज्ञापन भेजने का भी फैसला लिया है।
ज्ञापन के जरिए श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद का फास्टट्रैक कोर्ट में चार महीने के भीतर निस्तारण करने, पूजा स्थल अधिनियम-1991 को समाप्त करने, श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाने की अनुमति देने और जन्मभूमि-शाही ईदगाह परिसर के पुरातत्व सर्वेक्षण पर लगी रोक हटाने की मांग की जाएगी।
9 अगस्त को किया था कारसेवा का ऐलान
चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने अयोध्या में हुए श्रीराम मंदिर आंदोलन की तर्ज पर 9 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए कारसेवा का ऐलान किया था। रविवार को इसी सिलसिले में चित्रगुप्त पीठ पर देश के विभिन्न हिस्सों से साधु-संत पहुंचे।
हवन और पूजन के बाद संतों ने मंच से ‘कृष्ण लला हम आएंगे… मंदिर वहीं बनाएंगे’ के नारे लगाए और शंख बजाकर कारसेवा का संकल्प दोहराया। स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि संतों से विचार-विमर्श के बाद 6 दिसंबर को कारसेवा की तारीख तय की गई है। यह वही तारीख है, जिस दिन अयोध्या में कारसेवा हुई थी।
प्रशासन पर पत्थर हटाने का आरोप
कार्यक्रम के दौरान भरतपुर के बंसी पहाड़पुर से मंगाए गए पत्थरों का शिला पूजन नहीं हो सका। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर ने दावा किया कि प्रशासन ने इन पत्थरों को इधर-उधर कर दिया, जिसके चलते शिला पूजन का कार्यक्रम नहीं हो पाया।
कार्यक्रम में पशुपति अखाड़ा नेपाल के श्रीकृष्णानंद महाराज, मोहिनी शरण, राधा प्रसाद जू, अतुल कृष्णदास, स्वामी अवधेशानंद गिरि, संतोषानंद महाराज, आचार्य बद्रीश, दशरथ दास, अभिषेक दास, सुरेशानंद महाराज, चंद्रदेव महाराज, राहुल कृष्ण गोपाल, बसंतलाल देवेंद्रानंद सहित कई संत मौजूद रहे। शिंदे गुट शिवसेना के प्रदेश उपाध्यक्ष दीपक सक्सेना, बबलू लवानिया और मनोज सक्सेना भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
पीठ परिसर में दिनभर तैनात रही पुलिस
संतों के कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। बड़ी संख्या में साधु-संतों और लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए चित्रगुप्त पीठ और आसपास के इलाकों में दिनभर पुलिस बल तैनात रहा। मथुरा के अलावा आगरा जोन के विभिन्न जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया था। पीठ की ओर जाने वाले रास्तों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई और क्षेत्र में लगातार गश्त कर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई।
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