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हाई कोर्ट ने पिता को दी बड़ी राहत, कहा- बच्चे से मुलाकात के लिए फीस नहीं ली जा सकती, कस्टडी पर भी अहम टिप्पणी

August 04, 2026

नई दिल्ली । कर्नाटक (Karnataka) हाई कोर्ट (HighCourt) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी पिता को अपने बच्चे से मिलने के लिए शुल्क देना अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने फैमिली कोर्ट (FamilyCourt) के उस आदेश में संशोधन किया, जिसमें अलग रह रहे पिता को हर मुलाकात के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि जब मुलाकात अदालत के विजिटेशन रूम (VisitationRoom) में होनी है और इसके लिए किसी अतिरिक्त व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है, तब इस प्रकार का शुल्क (Fee) उचित नहीं माना जा सकता।

मामला ऐसे दंपती से जुड़ा है जिनके बीच तलाक का विवाद अभी न्यायालय में लंबित है। फिलहाल चार वर्षीय बच्चे की अंतरिम अभिरक्षा मां के पास है, जबकि पिता ने स्थायी अभिरक्षा के लिए अलग से याचिका दायर कर रखी है। फैमिली कोर्ट ने पहले आदेश दिया था कि पिता प्रत्येक महीने के निर्धारित दिनों में बच्चे से मिल सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें हर मुलाकात पर 5,000 रुपये का भुगतान करना होगा। साथ ही मुलाकात अदालत के विजिटेशन रूम में कराने का निर्देश भी दिया गया था।

हाई कोर्ट ने पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब स्वयं मां ने भी मुलाकात के लिए विजिटेशन रूम को उपयुक्त स्थान बताया है, तब किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क लेने का कोई औचित्य नहीं बनता। अदालत ने माना कि इस परिस्थिति में पिता पर आर्थिक बोझ डालना न्यायसंगत नहीं है। इसलिए फैमिली कोर्ट के शुल्क संबंधी निर्देश को हटाते हुए पिता को बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के बच्चे से मिलने की अनुमति दी गई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि दोनों पक्षों के निवास स्थान के बीच बहुत अधिक दूरी नहीं है, इसके बावजूद रिकॉर्ड से यह संकेत मिलता है कि कई बार मां समय पर बच्चे को मुलाकात के लिए नहीं लाती। अदालत ने कहा कि यदि भविष्य में भी ऐसा रवैया जारी रहता है तो इसका असर अंतिम अभिरक्षा के निर्णय पर पड़ सकता है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चे के हित सर्वोपरि हैं और दोनों अभिभावकों का सहयोग आवश्यक है।


  • पिता ने अदालत में यह भी आरोप लगाया कि उन्हें बच्चे से स्वतंत्र रूप से बातचीत करने का अवसर नहीं दिया जाता और इससे बच्चे के मानसिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी ओर मां का कहना था कि पिता से मिलने के दौरान बच्चा असहज महसूस करता है और वह बच्चे के पालन-पोषण का पूरा खर्च भी नहीं उठा रहे हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अंतरिम व्यवस्था में संशोधन करते हुए मुलाकात की प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक बनाने का प्रयास किया।

    हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मुलाकात के दौरान बच्चे के दादा-दादी उपस्थित नहीं रहेंगे, ताकि पिता और पुत्र को एक-दूसरे के साथ पर्याप्त समय बिताने का अवसर मिल सके। अदालत ने दोहराया कि अंतिम अभिरक्षा का निर्णय अभी लंबित है और वह मामले के सभी तथ्यों एवं बच्चे के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। इस फैसले को अभिरक्षा और मुलाकात के अधिकार से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।

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