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भोपाल से लखनऊ तक हाईस्पीड कनेक्टिविटी, 7 घंटे में पूरा होगा सफर; सागर, छतरपुर, महोबा और कानपुर जुड़ेंगे

September 27, 2026
भोपाल। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश (UP-MP) के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित भोपाल-लखनऊ एक्सप्रेसवे (Bhopal-Lucknow Expressway) दोनों राज्यों के कई प्रमुख शहरों को आपस में जोड़ेगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की देखरेख में तैयार हो रहे इस ग्रीनफील्ड कॉरिडोर (Greenfield Corridor) से भोपाल से लखनऊ के बीच यात्रा का समय मौजूदा करीब 14 से 15 घंटे से घटकर लगभग 7 घंटे होने की उम्मीद है।

करीब 600 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग हिस्सों में काम आगे बढ़ रहा है। प्रस्तावित रूट भोपाल से शुरू होकर विदिशा, सागर, छतरपुर और महोबा के कबरई से होते हुए हमीरपुर और कानपुर तक जाएगा। कानपुर से आगे यह लखनऊ की ओर जाने वाले एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ेगा।

4 से 6 लेन का होगा कंट्रोल एक्सेस एक्सप्रेसवे

नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को 4 से 6 लेन का कंट्रोल एक्सेस कॉरिडोर विकसित करने की योजना है। इस पर वाहनों की रफ्तार 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है। नए रूट से भोपाल और लखनऊ के बीच मौजूदा मार्ग की तुलना में यात्रा का समय काफी कम होने की संभावना है।


  • ये शहर होंगे कनेक्ट

    भोपाल-लखनऊ एक्सप्रेसवे से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहर सीधे या बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए जुड़ेंगे। इनमें—

    • भोपाल
    • विदिशा
    • सागर
    • छतरपुर
    • महोबा (कबरई)
    • हमीरपुर
    • कानपुर
    • लखनऊ

    शामिल हैं।

    तीन चरणों में विकसित होगा कॉरिडोर

    करीब 600 किलोमीटर लंबे इस मेगा कॉरिडोर को अलग-अलग चरणों में विकसित किया जा रहा है। दोनों राज्यों में भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रक्रियाओं के चलते परियोजना के विभिन्न हिस्सों में काम अलग-अलग स्तर पर आगे बढ़ रहा है।

    पहला चरण: कानपुर से महोबा जिले के कबरई तक करीब 112 से 118 किलोमीटर का ग्रीनफील्ड खंड विकसित किया जा रहा है। यह हिस्सा कानपुर रिंग रोड के रमाईपुर से शुरू होकर कबरई तक जाएगा। इस चरण की अनुमानित लागत करीब 5,757 करोड़ रुपये बताई गई है।

    दूसरा चरण: कबरई से मध्य प्रदेश के सागर तक करीब 223 किलोमीटर का हिस्सा प्रस्तावित है। यह बुंदेलखंड क्षेत्र से होकर गुजरेगा और क्षेत्र के प्रमुख शहरों की कनेक्टिविटी को बेहतर करेगा।

    तीसरा चरण: सागर से भोपाल के बीच करीब 150 किलोमीटर का खंड विकसित किया जाना है। इससे भोपाल को सागर और आगे उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क से सीधा संपर्क मिलेगा।

    कानपुर से लखनऊ तक भी बनेगा बेहतर संपर्क

    कानपुर पहुंचने के बाद एक्सप्रेसवे को शहर की आउटर रिंग रोड के जरिए निर्माणाधीन कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है। इससे भोपाल से लखनऊ तक लंबी दूरी की यात्रा के लिए एक बेहतर और तेज कॉरिडोर तैयार हो सकेगा।

    भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी

    भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे इस कॉरिडोर के निर्माण की तैयारियों में तेजी आई है। कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड खंड के लिए करीब 90 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण पूरा होने की जानकारी दी गई है। मध्य प्रदेश के सागर और विदिशा के साथ महोबा क्षेत्र में भी फोरलेन चौड़ीकरण और नए बाईपास से जुड़े कार्यों के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी किए जा रहे हैं।

    एक्सप्रेसवे के डिजाइन में स्थानीय यातायात और ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जा रहा है। इसके लिए विभिन्न स्थानों पर अंडरपास और एलिवेटेड सेक्शन बनाए जाने की योजना है, ताकि स्थानीय यातायात की आवाजाही बनी रहे और एक्सप्रेसवे पर वाहनों की गति भी प्रभावित न हो।

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