वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव के बीच दुनिया की नजरें एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) पर टिक गई हैं। पूर्व अमेरिकी जनरल और नाटो के सुप्रीम अलाइड कमांडर रह चुके वेस्ली क्लार्क (Wesley Clark) ने इसे ईरान का “परमाणु हथियार जैसा रणनीतिक साधन” बताया है।
उन्होंने कहा कि अगर संयुक्त राज्य अमेरिका इस अहम समुद्री रास्ते को बलपूर्वक खोलने की कोशिश करता है, तो उसे लंबी और बेहद महंगी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यही वजह है कि इस पर नियंत्रण को लेकर ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव लंबे समय से बना हुआ है।
CNN से बातचीत में क्लार्क ने साफ कहा कि होर्मुज को खोलना कोई आसान ऑपरेशन नहीं होगा।
उनके मुताबिक, “यह 1980 के दशक का टैंकर युद्ध नहीं है, हालात अब पूरी तरह बदल चुके हैं। ईरान पहले से कहीं ज्यादा तैयार है।”
क्लार्क ने चेतावनी दी कि इस जलमार्ग में अमेरिकी नौसेना को कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ सकता है—
इन सबके चलते किसी भी सैन्य कार्रवाई की कीमत काफी ज्यादा हो सकती है।
क्लार्क के अनुसार, ईरान ने वर्षों से इस क्षेत्र को मजबूत सैन्य ढांचे में बदल दिया है। संकरा समुद्री रास्ता और आसपास की पहाड़ियां उसे रणनीतिक बढ़त देती हैं। इन ऊंचाइयों से ईरानी सेना पूरे क्षेत्र पर नजर रख सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका किसी तरह इस रास्ते को खोल भी ले, तो उसे सुरक्षित बनाए रखना बड़ी चुनौती होगा। हाल के महीनों में कुछ जहाजों पर हमलों के बाद कई व्यापारिक जहाजों ने खुद ही ईरान के साथ तालमेल बनाना शुरू कर दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीति का अहम केंद्र बन चुका है। जब तक ईरान खुद इसे खोलने के लिए तैयार न हो, तब तक इसे पूरी तरह सुरक्षित और चालू रखना किसी भी बाहरी ताकत के लिए बेहद कठिन माना जा रहा है।
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