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खेतों की जमीनों पर उग आए होटल-रेस्टारेंट और ढ़ाबा, जिम्मेदार देख रहे तमाशा

May 18, 2026

  • भेड़ाघाट, पाटन, कटंगी, पनागर के बायपास किनारे धड़ल्ले से चल रहे व्यावसायिक कार्य

जबलपुर। जिले के नए मास्टर प्लान को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। आम नागरिक जहां लंबे समय से नए मास्टर प्लान के लागू होने का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन लोगों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने कृषि भूमि पर नियमों को दरकिनार कर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं। शहर के बाइपास से लगे कई क्षेत्रों में बिना वैध डायवर्सन और स्वीकृत नक्शों के होटल, रेस्टारेंट, बारात घर और अवैध कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। ऐसे में नए मास्टर प्लान के लागू होने से इन निर्माणों पर कार्रवाई की आशंका भी बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार भेड़ाघाट रोड स्थित अंधमूक चौराहा, पाटन-कटंगी चौराहा, महाराजपुर से पनागर बाइपास और नागपुर रोड के आसपास बड़ी संख्या में कृषि भूमि पर व्यावसायिक निर्माण किए गए हैं। टीएंडसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) के रिकॉर्ड में यह जमीनें अब भी कृषि भूमि के रूप में दर्ज हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयान कर रही है। खेतों की जगह अब आलीशान होटल, रेस्टारेंट, मैरिज गार्डन और अपार्टमेंट दिखाई दे रहे हैं।


  • बिना डायवर्सन चल रहे व्यवसाय
    इन निर्माणों में से अधिकांश में भूमि उपयोग परिवर्तन यानी डायवर्सन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। साथ ही कई भवनों का नक्शा भी संबंधित विभागों से स्वीकृत नहीं कराया गया। इसके बावजूद इन प्रतिष्ठानों का संचालन खुलेआम जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाइपास के किनारे तेजी से व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं और धीरे-धीरे पूरा क्षेत्र व्यवसायिक हब में तब्दील होता जा रहा है।

    करोड़ों के राजस्व नुकसान की आशंका
    सूत्रों के मुताबिक इन गतिविधियों की जानकारी नगर निगम, जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और जनपद पंचायत के अधिकारियों को भी है। इसके बावजूद कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि इन जमीनों का नियमानुसार डायवर्सन कराया जाता तो शासन को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता था, लेकिन नियमों की अनदेखी के चलते सरकार को हर साल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल
    नए मास्टर प्लान के लागू होने से पहले जिस तेजी से कृषि भूमि का उपयोग बदल रहा है, उसने प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। कागजों में जहां अब भी खेती योग्य जमीन दर्ज है, वहीं मौके पर बड़े-बड़े व्यवसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार विभागों द्वारा समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।शहर में चर्चाएं इस बात को लेकर भी हैं कि नया मास्टर प्लान लागू होने के बाद ऐसे निर्माणों को वैधता देने की कोशिश होगी या फिर नियमों के विरुद्ध बने प्रतिष्ठानों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन की चुप्पी और बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

    फैक्ट फाईल

    • 1. अंधमूक बायपास:
      यहां पर 99 फीसदी जमीन कृषि है, लेकिन 3 स्टार से लेकर कई बड़े ढाबे, रेस्टारेंट खुले हैं।
    • 2. तिलवारा रोड बायपास:
      यहां से बरगी तक की जमीन कृषि है, लेकिन यहां भी होटल, रेस्टारेंट खोल दिए हैं।
    • 3. महाराजपुर बायपास:
      यहां से पनागर बाइपास तक जाने वाली सड़क पर होटल और कमर्शियल दुकानें खुली हैं।
    • 4. कटंगी-पाटन बायपास:
      यहां पर सबसे ज्यादा अवैध कालोनियां है। इसके अलावा रेस्टारेंट खोले गए हैं।

    नहीं हो सकता कमर्शियल प्रयोग
    मास्टर प्लान में बाइपास से लगी भूमि, कृषि भूमि है और यहां पर कमर्शियल उपयोग नहीं किया जा सकता। इसके डायवर्सन में कृषि उपयोग ही करना अनिवार्य है।
    राजेश दीवान, असिस्टेंट ड्राफ्टमैन, टीएंडसीपी

    भूमि जहां दर्ज, वहां ही हो उपयोग
    नगर निगम और जिला प्रशासन की सीमा में आने वाले मास्टर प्लान में जो भूमि कृषि में दर्ज है, उसका उपयोग कृषि में ही होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हो रहा है, तो इनके खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
    अभिषेक गहलोत, सीईओ, जिला पंचायत

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