
नई दिल्ली । निर्माण उद्योग (Construction Industry) में इस्तेमाल होने वाले कंक्रीट (Concrete) को लेकर हुई एक रिसर्च में इंसानी कचरे (Human Waste) से तैयार बायोचार (Biochar) के इस्तेमाल की संभावना सामने आई है। सेप्टिक टैंकों और सैनिटेशन सिस्टम से मिलने वाले उपचारित इंसानी कचरे को प्रोसेस करके बायोचार तैयार किया गया और इसे कंक्रीट में सीमेंट (Cement) के आंशिक विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करके इसकी क्षमता जांची गई।
बायोचार कार्बन से भरपूर पदार्थ होता है। रिसर्च में उपचारित मल के कचरे से तैयार इस सामग्री को कंक्रीट में अलग-अलग मात्रा में मिलाकर उसके प्रदर्शन का परीक्षण किया गया। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या इस तरह तैयार सामग्री कंक्रीट की मजबूती और टिकाऊपन को प्रभावित कर सकती है।
रिसर्च के दौरान कंक्रीट में सीमेंट की जगह 5 से 10 प्रतिशत तक बायोचार का इस्तेमाल करने के परिणाम बेहतर पाए गए। खास तौर पर 10 प्रतिशत बायोचार वाले कंक्रीट के नमूनों में 91 दिनों की क्योरिंग के बाद कंप्रेसिव स्ट्रेंथ में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी नमूने में फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ 42 प्रतिशत अधिक देखी गई।
कंप्रेसिव स्ट्रेंथ से यह पता चलता है कि कंक्रीट कितना दबाव सहन कर सकता है। वहीं फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ से उसके मुड़ने और क्रैकिंग जैसी परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता का आकलन किया जाता है। रिसर्च में बायोचार की अलग-अलग मात्रा के साथ इन दोनों गुणों के अलावा पानी सोखने की क्षमता, पोरॉसिटी और सूखने के दौरान होने वाले सिकुड़न जैसे पहलुओं की भी जांच की गई।
अध्ययन में 15 प्रतिशत बायोचार वाले कंक्रीट का भी परीक्षण किया गया। 28 दिनों के बाद इसकी पानी सोखने की क्षमता और पोरॉसिटी पारंपरिक कंक्रीट के बराबर पाई गई। इससे इस सामग्री के व्यवहार को समझने में मदद मिली।
समय के साथ सामग्री की स्थिरता को भी जांचा गया। 120 दिनों के बाद 10 प्रतिशत बायोचार वाले मोर्टार में सूखने के दौरान होने वाला सिकुड़न साधारण पोर्टलैंड सीमेंट मोर्टार के समान पाया गया। इससे संकेत मिला कि निर्धारित मात्रा में बायोचार मिलाने पर सामग्री अपना आकार और स्थिरता बनाए रख सकती है।
रिसर्च में बायोचार की मात्रा बढ़ने के साथ कंक्रीट के नमूनों में भारी धातुओं की मात्रा में कमी भी देखी गई। इसके आधार पर पर्यावरण में हानिकारक पदार्थों के रिसने की संभावना कम होने की बात सामने आई। हालांकि, निर्माण कार्यों में इस सामग्री के बड़े स्तर पर इस्तेमाल से पहले अतिरिक्त शोध और वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण की आवश्यकता बताई गई है।
इस तकनीक से पर्यावरण के स्तर पर दोहरा लाभ मिलने की संभावना बताई गई है। पहला, उपचारित इंसानी कचरे को उपयोगी निर्माण सामग्री में बदला जा सकता है। दूसरा, कंक्रीट में सीमेंट की कुछ मात्रा को कम किया जा सकता है।
सीमेंट निर्माण में बड़ी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होती है और इसे वैश्विक कार्बन उत्सर्जन के प्रमुख कारणों में शामिल किया जाता है। ऐसे में सीमेंट के आंशिक विकल्प के रूप में बायोचार का इस्तेमाल निर्माण क्षेत्र में पर्यावरणीय प्रभाव कम करने की दिशा में उपयोगी हो सकता है।
हालांकि, मौजूदा निष्कर्षों को बड़े पैमाने पर निर्माण में सीधे लागू करने से पहले आगे की रिसर्च और वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण जरूरी होंगे। अध्ययन ने यह संभावना जरूर दिखाई है कि उपचारित इंसानी कचरे से तैयार बायोचार को नियंत्रित मात्रा में कंक्रीट में शामिल करके उसकी कुछ विशेषताओं को बेहतर किया जा सकता है।
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