img-fluid

अग्निबाण का बड़ा असर: सुप्रीम कोर्ट से इंदौर विकास प्राधिकरण की ऐतिहासिक जीत, 600 करोड़ का नुकसान टला

October 01, 2026

इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) की योजना 140 के 98 बेजकीमती भूखंडों के आवंटन से जुड़े विवादित मामले में आखिरकार सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) से प्राधिकरण के पक्ष में बड़ा और ऐतिहासिक फैसला आ गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने न केवल आईडीए को 600 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित आर्थिक नुकसान से बचा लिया है, बल्कि यह फैसला भविष्य में आने वाले ऐसे अन्य मामलों के लिए भी एक नजीर (Precedent) साबित होगा।

क्या था पूरा मामला?
इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना 140 में स्थित 98 भूखंडों को लेकर टेंडर प्रक्रिया पर विवाद खड़ा हुआ था। करीब 5 वर्ष पूर्व बुलाए गए टेंडर के आधार पर इन भूखंडों के आवंटन को लेकर कानूनी व प्रशासनिक स्तर पर खींचतान चल रही थी।
उस समय मध्य प्रदेश के एडवोकेट जनरल (AG) की ओर से प्राधिकरण को विधिक अभिमत (Legal Opinion) दिया गया था, जिसमें पुरानी दरों पर ही टेंडर स्वीकृत करने या ब्याज सहित राशि लौटाने की बात कही गई थी। इस विधिक अभिमत की सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि जो राशि प्राधिकरण के खाते में कभी जमा ही नहीं हुई थी, उस पर भी ब्याज देने की अनुशंसा कर दी गई थी। यदि प्राधिकरण एजी के उस विधिक अभिमत को मान लेता, तो उसे उस समय 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का फटका लगता, जो वर्तमान समय में बढ़कर 600 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान बन चुका था।
‘अग्निबाण’ ने किया था फर्जीवाड़े व नुकसान का पर्दाफाश
प्राधिकरण के कई वरिष्ठ अधिकारी एजी के इस विधिक अभिमत पर आंख मूंदकर सहमति जता रहे थे और इसे लागू करने की तैयारी में थे। हालांकि, अग्निबाण ने जनहित और इंदौर शहर के विकास के आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए इस पूरे मामले को प्रमुखता से उजागर किया था।
अग्निबाण ने खबरों की श्रृंखला के माध्यम से यह खुलासा किया था कि:
प्राधिकरण ऐसे विधिक अभिमत को मानने के लिए कतई बाध्य नहीं है, जो संस्था के हितों के खिलाफ हो।
टेंडर प्रक्रिया में जो राशि प्राधिकरण के खाते में आई ही नहीं, उस पर ब्याज देना पूरी तरह अनुचित था।
पुरानी दरों पर भूखंड देने से शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे नए फ्लाईओवरों और मास्टर प्लान की सड़कों) के लिए इस्तेमाल होने वाला करोड़ों का फंड डूब जाता।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और ऐतिहासिक फैसला
अग्निबाण के खुलासे और विरोध के बाद प्राधिकरण बोर्ड पर दबाव बढ़ा और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। प्राधिकरण ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पुराने निर्देशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की।
सुप्रिम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इंदौर विकास प्राधिकरण के रुख को सही ठहराया और स्पष्ट किया कि:
1. प्राधिकरण का विवेकाधिकार सुरक्षित: संस्थाओं को अपने आर्थिक हितों की रक्षा करने और अनुचित टेंडर प्रक्रियाओं को निरस्त कर नई टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का पूरा अधिकार है।
2. सार्वजनिक नीलामी अनिवार्य: बेजकीमती सरकारी व प्राधिकरण संपत्तियों का निस्तारण केवल नई सार्वजनिक नीलामी (NIT) के जरिए ही होगा ताकि पारदर्शी तरीके से अधिकतम राजस्व प्राप्त हो सके।
अन्य मामलों के लिए बनेगा नजीर
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय इंदौर विकास प्राधिकरण के साथ-साथ राज्य के अन्य विकास प्राधिकरणों और सरकारी निकायों के लिए भी नजीर बनेगा। अब कोई भी निकाय अनुचित लीगल एडवाइज या पुराने टेंडरों के दबाव में आकर जनता का पैसा गंवाने के लिए मजबूर नहीं होगा। इस फैसले से इंदौर के विकास कार्यों और मास्टर प्लान परियोजनाओं के लिए 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सुरक्षित हो गई है।

Share:

  • हर बच्चे की थाली में सुरक्षित भोजन: पोषण, स्वच्छता और गुणवत्ता का संकल्प

    Thu Oct 1 , 2026
    नई दिल्ली. किसी बच्चे (child) के लिए स्कूल में मिलने वाला भोजन (Meal) केवल एक थाली नहीं होता। वह उसके दिन की ऊर्जा, उसके स्वास्थ्य की जरूरत और कई बार उसके परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा होती है। इसलिए बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी केवल पेट भरने तक सीमित नहीं हो सकती। […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved