
अग्निबाण ब्रेकिंग… योजना 77 में शामिल कनाड़िया रोड की बेशकीमती जमीन को लेकर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने दिया आदेश प्राधिकरण के साथ नगर तथा ग्राम निवेश भी करेगा अपील, विधिक राय भी ली
इंदौर, राजेश ज्वेल
प्राधिकरण (Authority) की योजना 77 (Scheme 77) में शामिल 200 करोड़ रुपए ( ₹200 crore.) की बेशकीमती जमीन को योजना से मुक्त रखने के साथ दी गई अनुमतियों को निरस्त करने के आदेश भी हाईकोर्ट (High Court) की सिंगल बैंच ने रद्द कर दिए। इतना ही नहीं, शासन द्वारा मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 31 और 32 के तहत अपील और पुनरीक्षण के जो आदेश जारी करते हुए संभागायुक्त को अपीलीय प्राधिकारी नियुक्त करती है उसे भी हाईकोर्ट ने अवैध करार दे डाला। इस फैसले से भौंचक प्राधिकरण के साथ नगर तथा ग्राम निवेश भी अब डबल बैंच में अपील करने जा रहा है और इसके लिए विधिक राय भी ले ली गई और शासन के विधि विभाग से अनुमति मांगी जा रही है। उक्त जमीन कनाड़िया रोड से लगी हुई ग्राम खजराना में आती है, जिसका वर्तमान बाजार मूल्य 15 से 20 हजार रुपए प्रति स्क्वेयर फीट से कम नहीं है और अभी हाईकोर्ट आदेश से जो जमीन पर विकास अनुमति बहाल करने का निर्णय हुआ, उसमें लगभग सवा लाख स्क्वेयर फीट जमीन शामिल है।
अभी पिछले दिनों धारा 16 के एक आदेश को लेकर न्यायिक जगत में खूब चर्चा है, जिसके चलते कलेक्ट्रेट स्थित कॉलोनी सेल ने चार कॉलोनियों को विकास अनुज्ञाएं जारी कर डाली। वहीं वेकेशन यानी छुट्टियों में ही एक और आदेश हुआ, जो कि सिकंदर और अन्य विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन की रीट पीटीशन में दिया गया, जिसमें इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना 77 में शामिल कनाडिय़ा रोड से लगी हुई सर्वे नम्बर 1393/1, 1393/2/1, 1393/2/2/1 और 1393/2/2/2 की कुल 3.885 हेक्टेयर जमीन, जो कि लगभग सवा 4 लाख स्क्वेयर फीट होती है। ग्राम खजराना, तहसील जूनी इंदौर में आने वाली इस जमीन की वर्तमान कीमत 200 करोड़ रुपए तक आंकी जा सकती है, क्योंकि बंगाली चौराहे से आगे कनाडिय़ा रोड की यह जमीन 15 से 20 हजार स्क्वेयर फीट से कम कीमत की नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि पूर्व में दी गई विकास अनुमति को निरस्त नहीं किया जा सकता और साथ ही शासन ने मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 31 और 32 के तहत अपील और पुनरीक्षण का जो प्रावधान किया है, जिसके चलते नियम 23-1 में संशोधन कर संभागायुक्त को अपीलीय प्राधिकारी नियुक्त किया गया है, उसकी भी प्रक्रिया अवैध है। यानी हाईकोर्ट के इस आदेश के चलते अब अपीलीय प्राधिकारी की नियुक्ति ही नहीं हो सकती और वर्तमान में भी योजनाओं में शामिल जमीनों की जो अपीलें संभागायुक्तों के पास लम्बित है, वह भी स्वत: समाप्त हो जाएगी। नतीजतन नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा भी इस आदेश के विरुद्ध अपील की जा रही है। संयुक्त संचालक सुभाशीष बनर्जी से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस बारे में विधिक अभिमत अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्यालय से प्राप्त कर लिया है और अब शासन के विधि विभाग से अनुमति ली जा रही है। दूसरी तरफ इस आदेश से भौंचक प्राधिकरण द्वारा भी डबल बैंच के समक्ष अपील की जाएगी, क्योंकि उसकी भी कई योजनाओं में धारा 31 के तहत अपीलीय प्राधिकारी ने ना सिर्फ आदेश जारी किए हैं, बल्कि कई अन्य प्रकरण वर्तमान में भी विचाराधीन हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण ने अभी तक योजना 77 को डीनोटिफाइड नहीं किया है, जिसकी पिछले कई समय से प्रक्रिया चल रही है। प्राधिकरण दरअसल 1 दर्जन योजनाओं को डीनोटिफाइड करना तो चाहता है, मगर उसके लिए अभी तक शासन से मंजूरी नहीं मिली है। यह भी उल्लेखनीय है कि इसी योजना 77 में चर्चित अयोध्यापुरी कॉलोनी है, जो कि देवी अहिल्या श्रमिक कामगार संस्था के अधीन आती है और प्रशासन ने 4 साल पहले ऑपरेशन भूमाफिया के चलते पीड़ित भूखंडधारकों को कब्जे दिलवाए थे, उसके बाद योजना से जमीन को मुक्त करने की मांग भी रहवासी संघ द्वारा की जाती रही है। इसी योजना में कनाडिय़ा रोड स्थित यह जमीन भी शामिल है, जिसे लेकर हाईकोर्ट आदेश हुए हैं। हालांकि इस आदेश के तहत अभी तक प्राधिकरण ने ना तो एनओसी जारी की है और ना ही नगर तथा ग्राम निवेश ने अभिन्यास मंजूर किया है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि विकास अनुमति जारी होने के बाद यह कहना उचित नहीं है कि धोखाधड़ी के तथ्यों को छुपाकर अनुमति प्राप्त की गई। लिहाजा नियम 25 भी इसमें लागू नहीं होता है। हाईकोर्ट ने आठ हफ्ते में विधि अनुरूप निर्णय लेते हुए निगम को भी निर्देश दिए कि वह कॉलोनी विकास अनुमति आवेदन पर फैसला करे और नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा भी अभिन्यास निरस्त करना अवैध था।
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