
इंदौर। आज सुबह-सुबह नगर निगम (Municipal council) की रिमूवल टीम ने महारानी रोड (Maharani Road) और सियागंज (Siyaganj) से सटे हिस्से में बरसों पुराना मकान ढहाने (demolished) की कार्रवाई बमुश्किल शुरू की, क्योंकि अंदर पोकलेन ले जाने की जगह ही नहीं थी और जैसे-तैसे पोकलेन के लिए रास्ता बनाया गया और चढ़ावों को तोडऩे से लेकर कई बिजली के खंभे हटाए गए। जैसे- तैसे पोकलेन अंदर भेजकर कार्रवाई शुरू कराई ही थी कि अचानक जर्जर मकान का बड़ा हिस्सा भरभरा कर निगमकर्मियों पर ही आ गिरा। हालांकि संयोग से किसी को चोट नहीं आई। मकान पूरी तरह खाली था और नीचे कुछ दुकानें थीं, वह भी खाली थीं। सघन इलाका होने के चलते तोडफ़ोड़ की कार्रवाई में तमाम दिक्कतें आईं।
नगर निगम द्वारा शहरभर में खतरनाक मकानों को बारिश के चलते ढहाने की कार्रवाई की जा रही है। इसी के चलते हर रोज अलग-अलग क्षेत्रों में निगम द्वारा हवा में झूल रहे मकानों को गिराया जा रहा है। अब तक 25 से ज्यादा ऐसे मकान ढहाए जा चुके हैं और आज सुबह फिर निगम का अमला पुलिस बल के साथ 17/2 महारानी रोड के समीप सियागंज पहुंचा। यहां पर जी+3 का 1800 वर्गफीट का बरसों पुराना मकान खतरनाक हालत में था और उसे तोडऩे की कार्रवाई होना थी, लेकिन महारानी रोड की तंग गलियों में पोकलेन अंदर पहुंचाना मुश्किल लग रहा था, क्योंकि कई दुकानों और गोडाउनों के बाहर बने चढ़ाव के कारण फजीहत होती रही। बाद में निगम के रिमूवल अधिकारी अंकेश बिरथरिया और सहायक रिमूवल अधिकारी बबलू कल्याणे वहां चढ़ावों और कुछ ओटले जेसीबी की मदद से तोड़े, साथ ही बाधक बन रहे बिजली के खंभों और तारों को भी हटाया, जिसके बाद पोकलेन अंदर भेजी जा सकी।
पोकलेन का पंजा लगते ही अचानक काफी हिस्सा भरभरा कर निगमकर्मियों पर गिरा
सुबह कार्रवाई के लिए पोकलेन जैसे-तैसे अंदर भेजने के बाद तोडफ़ोड़ शुरू कराई गई तो जर्जर मकान की हालत इतनी खराब थी कि पोकलेन चालक ने जैसे ही पहला पंजा मारा तो मकान की गैलरी से लेकर काफी हिस्सा अचानक भरभरा कर ढह गया। वहां समीप ही निगमकर्मी गणेश और कुछ अन्य कर्मचारी खड़े हुए थे। उन पर मलबे का कुछ हिस्सा गिरा, लेकिन किसी को चोट नहीं आई तो फिर बाद में निगम के रिमूवल कर्मचारियों को एक ओर खड़ा रहने को कहा गया और सभी गलियां पैदल आवागमन के लिए भी बंद कर दी गईं, तब जाकर कार्रवाई तेजी से शुरू हो पाई।
15 दिन में 3 बार तारीख लगी, हर बार कार्रवाई टली
उक्त मकान जिस स्थान पर है, वहां महारानी रोड और सियागंज के बीचोबीच बना यह मकान काफी समय से खतरनाक हालत में था और दिनभर उक्त क्षेत्र में बड़ी संख्या में व्यापारियों के साथ ही ग्राहकों का आवागमन होता है। ऐसे में उक्त मकान को तोडऩे के लिए नगर निगम ने पिछले 15 दिन में तीन बार तारीखें लगाईं, लेकिन कभी पुलिस बल नहीं मिलने से तो कभी अन्य कारणों के चलते कार्रवाई टलती रही और आखिरकार आज सुबह मकान को ढहा ही दिया गया।
बरसों से खाली था पांच दुकानों वाला जर्जर मकान
नगर निगम के रिमूवल अधिकारी बिरथरिया के मुताबिक मकान जी+3 का 1800 वर्गफीट का बना हुआ था। उसकी तल मंजिल में पांच दुकानें थीं, जो खाली थीं और मकान के कई हिस्सों में काफी हिस्से खाली ही पड़े थे। मकान कंचनबाई शाह और अन्य के नाम पर बताया जाता है। सुबह कार्रवाई के दौरान भवन मालिक और उसका परिवार भी वहां पहुंच गया था।
अफसरों से कहते रहे सिर्फ जर्जर हिस्सा तोड़ो
आज सुबह जब निगम के अधिकारी जर्जर मकान को ढहाने पहुंचे तो भवन मालिक से जुड़े परिवार के लोग भी मौके पर पहुंच गए थे। उन्होंने निगम अधिकारियों से कहा कि वे खतरनाक मकान के जर्जर हिस्सों को तोड़ दें, लेकिन निगम अफसर नहीं माने और खस्ताहल स्थिति में था तो पूरा मकान ही ढहा दिया गया।
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