
सगाई का कहकर हल्दी-मेहंदी, संगीत सब हुआ लेकिन अधिकारियों को नजर ही नहीं आया, कल तीज पूजा के लिए भी पहुंची नाबालिग, 2 दिन मायके तो 2 दिन ससुराल रहकर दे रहे झांसा
इंदौर। महिला एवं बाल विकास विभाग और सांवेर (Sanwer) में तैनात अधिकारियों की नाक के नीचे पढ़ाई जारी रखने की इच्छा रखने वाली नाबालिग (minor) का कथित रूप से बाल विवाह (Child Marriage) करा दिया गया। मामला इसलिए और गंभीर है, क्योंकि शादी रोकने के लिए पहले ही शिकायत की जा चुकी थी। शिकायत के बाद उड़नदस्ते ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा बनाया, नाबालिग के पिता से शपथ पत्र भी लिया कि बेटी की शादी बालिग होने के बाद ही करेंगे। कागजी कार्रवाई पूरी हुई और अधिकारी लौट गए। उसके बावजूद भी आरोप है कि इसके बाद नाबालिग की शादी ही करा दी गई।
नाबालिग बच्चियों को विवाह बेदी पर बलि चढ़ाने से रोकने के लिए तैनात किया जाए दस्ते पर ही अब सवालिया निशान लगने लगे हैं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति सामने आई है। जिस बच्ची को बचाने के लिए शिकायतकर्ता ने 24 जून को बाल विवाह रोकने के लिए शिकायत की थी, उसके बावजूद भी शादी हो गई। शिकायत के बाद संबंधित टीम ने कार्रवाई करते हुए पंचनामा बनाने का दिखावा किया। नाबालिग के पिता से शपथ पत्र लिया गया कि बेटी नाबालिग है और 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद ही उसका विवाह करेंगे। बावजूद इसके शिकायतकर्ता का दावा है कि बाद में इसी नाबालिग का विवाह कर दिया गया। हल्दी, संगीत के साथ शादी होने के कई पुख्ता सबूत मय फोटो के विभाग को सौंपे गए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग अधिकारी रजनीश सिन्हा ने पूरे मामले की जांच कर शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई की बात कही है।
सगाई बताकर पूरी की रस्में, जिम्मेदारों को भनक तक नहीं
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बाल विवाह की शिकायत पहले ही प्रशासन तक पहुंच चुकी थी, तो फिर हल्दी, मेहंदी, संगीत माता पूजन से लेकर विवाह तक की रस्में कैसे पूरी हो गईं। विभाग की निगरानी टीम और उड़नदस्ते की कार्यप्रणाली पर भी इस घटना के बाद सवालिया निशान लग रहे हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक परिवार की ओर से इसे सगाई बताया जाता रहा है, जबकि शादी की तैयारियां और रस्में चलती रहीं। देर रात फेरे भी हुए पर बेटी को विदा नहीं किया।
दो दिन मायके, दो दिन ससुराल… निगरानी को भी दे रहे चकमा
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि नाबालिग को कभी मायके तो कभी ससुराल में रखा जा रहा है। दो दिन मायके और दो दिन ससुराल रखकर मामले को सामान्य दिखाने की कोशिश की जा रही है। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता के मुताबिक नाबालिग मंगलवार को तीज पूजा के लिए भी ससुराल पहुंची थी। क्षेत्र की ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ता या अधिकारियों को उक्त नाबालिग के सिर पर सिंदूर, मंगलसूत्र और पैर में बिछडी भी नजर नहीं आई है। नाबालिग बालिका का मेडिकल परीक्षण कराए जाने की भी मांग की गई है।
पैसे लेने का आरोप, आवेदक की जानकारी की उजागर
मामले में कार्रवाई करने पहुंचे अधिकारियों, कर्मचारियों और पुलिस बल पर भी शिकायतकर्ता ने पैसे लेने के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि जांच के बाद ही पुष्टि होगी। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर बाल विवाह में शामिल लोगों के साथ-साथ रिसोर्ट मालिक, इवेंट ऑर्गेनाइजर और डेकोरेशन वाले पर भी प्रकरण दर्ज किया जाए। यदि जांच में लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। आवेदक ने लिखित में शिकायत देते हुए विभाग द्वारा उसकी पहचान उजागर करने के भी आरोप लगाए हैं और कहा है, जिसके चलते उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही है, इसलिए उसने प्रोटेक्शन की मांग की है।
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