
15 साल बाद अष्टमी तिथि…रोहिणी नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में मनेगा श्रीकृष्ण प्राकट्योत्सव
इंदौर। सन् 1832 में मात्र 80 हजार की लागत से बने, फिर 20 करोड़ से अधिक की राशि से सजे- संवरे प्राचीन गोपाल मंदिर (Gopal Mandir) की जन्माष्टमी (Janmashtami ) इस बार खास अंदाज (special) में रहेगी। मंदिर में आकर्षक विद्युत सज्जा के साथ बाल गोपाल की झांकियां सजाई जा रही हैं। रात्रि में 12 बजे धूमधाम से होलकर काल की तर्ज पर महाआरती की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि शहर का गोपाल मंदिर बीते 194 वर्ष से राधा-कृष्ण की भक्ति की गाथा सुना रहा है । मंदिर का निर्माण महारानी कृष्णाबाई होलकर ने करवाया था और तभी से यह शहर के लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर बनने के बाद महारानी के सब मनोरथ पूर्ण हुए थे। इसलिए इंदौरवासी भी मानते हैं कि गोपाल मंदिर में जो भी अपनी मनोकामनाओं को लेकर आता है, वह कभी भी खाली हाथ नहीं जाता है। भगवान कृष्ण और राधा रानी हमेशा उनकी इच्छाओं को पूर्ण करते हैं और सदैव उनके साथ रहते हैं। देशभर में 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इस बार 15 साल बाद जन्माष्टमी पर ऐसा विशेष संयोग बन रहा है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं रामचंद्र शर्मा के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार जन्माष्टमी पर भी इसी तरह का संयोग बन रहा है। कई बार जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि तो रहती है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बनता। इस बार दोनों एक ही दिन मिल रहे हैं। यही वजह है कि इस जन्माष्टमी को विशेष माना जा रहा है। इस बार वैष्णव और रामानंदी समेत सभी प्रमुख संप्रदायों में 4 सितंबर को ही जन्माष्टमी मनाई जाएगी।
मध्यरात्रि में नक्षत्र का संयोग
ज्योतिषाचार्य के अनुसार जन्माष्टमी की अर्धरात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का एक साथ होना विशेष फलदायी माना जाता है। कई वर्षों में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर वृष राशि में चंद्रमा तो रहता है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बन पाता। इस बार सभी प्रमुख ज्योतिषीय तत्व एक साथ आ रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं में भी ऐसे संयोग में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
वृंदावन से बिक्री के लिए आईं सामग्रियां
जन्माष्टमी के लिए वृंदावन से श्रीकृष्ण (लड्डू गोपाल और ठाकृर बांकेबिहारी) के लिए हाथ से बनी और डिजाइनर आकर्षक पोशाकें शहर में बिक्री के लिए आ चुकी हैं। इन पोशाकों पर जरी, गोटा-पट्टी, जरदोजी, और सुंदर मोतियों की बारीक कढ़ाई की गई है। रानी पिंक, लेमन येलो, मयूरी हरा और सात्विक सफेद जैसे आकर्षक रंगों में ये पोशाकें और सजे-संवरे बाल गोपाल के पालने भक्तों को लुभा रहे हैं।
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