
21 केटल लिफ्टर के साथ 64 पेट्रोलिंग व्हिकल नेशनल और स्टेट हाईवे के साथ प्रमुख सड़कों पर एमपीआरडीसी ने किए तैनात
इंदौर। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश पर सड़क सुरक्षा (road safety) को लेकर शासन स्तर पर जो प्रयास किए गए उसकी रिपोर्ट सड़क सुरक्षा समीक्षा बैठक में प्रस्तुत की गई। परिवहन सचिव मनीष सिंह द्वारा जो प्रजेंटेशन दिया गया उसमें सड़क हादसों (Road accidents) में कमी आने और 6 माह में 1.2 फीसदी दुर्घटनाएं, तो 8.9 फीसदी मौतों की संख्या घटी है। ब्लैक स्पॉट सुधारने के मामले में भी प्रगति बताई गई, जिसमें इंदौर के ही रालामंडल, राऊ सर्कल और एमआर-10 का उदाहरण दिया गया, जहां पर मौत का आंकड़ा ब्लैक स्पॉट सुधार के बाद शून्य पर इस साल रहा है, जबकि उसके पूर्व दुर्घटनाओं के साथ मौतें भी होती रही।
इस रिपोर्ट में बताया गया कि जनवरी से जून-26 तक इंदौर सहित पूरे प्रदेश में 31443 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 31812 थी। इस तरह 369 दुर्घटनाएं घटी। वहीं मौतों की संख्या 9078 से घटकर 8273 रह गई। यानी 805 मौतें भी कम हुई। कल भोपाल में हुई समीक्षा बैठक में बताया गया कि सड़क सुरक्षा को डेटा आधारित बनाने के लिए डाटा ड्राइवन हाईपर लोकल इंटरवेंशन तकनीक पर जोर दिया जा रहा है और एमपीआरडीसी तथा आईआईटी मद्रास के बीच राज्य व्यापी समझौता भी हुआ है, जिसके तहत इंदौर सहित सभी 55 जिलों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए और रोड सेफ्टी सर्वे एप भी शुरू हुआ है। अभी तक 15 डीडीएचआई रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी है। हिट एंड रन पीड़ितों को मुआवजे के मामले में भी तेजी आई है। अभी जुलाई तक मृतकों के परिजनों द्वारा जो 259 आवेदन किए गए उनमें से 161 स्वीकृत हुए, जबकि गंभीर रूप से घायल 171 आवेदकों में से 116 दावे मंजूर हुए हैं। राहवीर योजना से गोल्डन हॉवर्स में मदद पहुंचाने वाले नागरिकों की संख्या भी बढ़ी है, जिसमें केन्द्र सरकार की इस योजना के तहत प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। अभी तक 14.75 लाख रुपए की राशि दी जा चुकी है। राजमार्गों पर 105 से अधिक टोल प्लाजा के पास एम्बुलेंस उपलब्ध है, तो 5 हजार से अधिक जीवन बचाने का दावा भी किया गया है। इतना ही नहीं, एमपीआरडीसी का दावा है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नेशनल स्टेट सहित प्रमुख मार्गों से आवारा पशुओं को भी हटाया गया, जो दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। अभी 21 कैटर लिफ्टर व्हिकल इस कार्य के लिए तैनात किए गए हैं, तो 64 पेट्रोलिंग व्हिकल भी इन प्रमुख मार्गों पर तैनात रहते हैं। ऐसे 94 हॉटस्पॉट भी चिन्हित किए गए, जहां पर सबसे अधिक पशुओं का जमावड़ा रहता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में प्रदेश में पैदल यात्रियों की सुरक्षा, पैदल क्रॉसिंग, हेलमेट, गलत लेन में वाहन चलाने, असुरक्षित ओवरटेकिंग और अनधिकृत एलईडी/स्ट्रोब लाइट एवं हूटर के इस्तेमाल पर विशेष कार्रवाई की योजना बनाई गई है। भोपाल, ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर में फुटपाथ ऑडिट, जीआईएस मैपिंग, अतिक्रमण हटाने, स्मार्ट लाइटिंग और सीसीटीवी आधारित निगरानी जैसे उपाय प्रस्तावित हैं। हेलमेट नियमों के पालन के लिए एआई आधारित कैमरों से रियल-टाइम निगरानी, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों को हेलमेट अनुपालन जोन बनाने और गैर आईएसआई हेलमेट की बिक्री पर कार्रवाई जैसे कदम प्रस्तावित हैं। एमपीआरडीसी ने पायलट परियोजना के तहत 22 सेफ स्कूल जोन स्वीकृत किए हैं, जिन पर लगभग 20 जिलों में करीब 14 करोड़ रुपए निवेश का प्रावधान बताया गया है। इसके अलावा 12 महत्वपूर्ण जंक्शनों को मॉडल जंक्शन/पैदल यात्री क्षेत्र के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस द्वारा जनवरी से जून 2026 के दौरान 8,393 सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाए गए। 6,282 स्कूलों में यातायात शिक्षा दी गई और 6.53 लाख से अधिक विद्यार्थियों सहित कुल 10.88 लाख से अधिक लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।
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