
इंदौर। जनगणना-2027 (census) इस बार केवल आबादी गिनने (Counting the population) तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार (Government) गांव और शहर का ऐसा एक्स-रे कराने जा रही है, जिसमें विकास की हर छोटी-बड़ी हकीकत सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होगी। जनगणना टीम अगले चरण में गांव-शहर की एक-एक सुविधा की पड़ताल करेगी। किस गांव में पीने का पानी पूरे साल आता है या नहीं, कितने हैंडपंप चालू हैं, अस्पताल में कितने डॉक्टर और कितने बिस्तर हैं, स्कूल में कौन-कौन सी कक्षाएं संचालित हैं, गांव तक पक्की सडक़ पहुंची या नहीं, मोबाइल नेटवर्क कैसा है, बैंक और एटीएम हैं या नहीं।
इस बार सरकार जनगणना नहीं, बल्कि जिले के विकास का आईना तैयार कर रही है। जिन गांवों और शहरों में वर्षों से सडक़, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा या अन्य सुविधाओं की कमी है, उनकी तस्वीर अब सरकारी दस्तावेजों में दर्ज होगी। 1 अगस्त से ट्रेएंड की गई टीमें घर-घर, गली-मोहल्ले जाकर 30 दिन में वास्तविक डाटा तैयार करेंगी। आने वाले वर्षों की योजनाएं, बजट और विकास कार्य इसी विस्तृत रिपोर्ट कार्ड के आधार पर तय किए जाएंगे। हर सवाल का जवाब 32 पेज की जिला जनगणना हस्तपुस्तिका में दर्ज होगा।
मोबाइल ऐप से होगी निगरानी
पूरा सर्वे मोबाइल ऐप के जरिए किया जाएगा। फील्ड अधिकारी मौके पर जानकारी अपलोड करेंगे, जबकि चार्ज अधिकारी वेब पोर्टल पर उसका सत्यापन करेंगे। यदि कोई जानकारी अधूरी या गलत मिली तो उसे वापस भेजकर दोबारा जांच कराई जाएगी। अंतिम रिपोर्ट तैयार होने से पहले 2011 की जनगणना के रिकॉर्ड से भी मिलान किया जाएगा।
सार्वजनिक सुविधाओं की जानकारी
टीम यह भी देखेगी कि गांव राष्ट्रीय या राज्य राजमार्ग से जुड़ा है या नहीं, बस सेवा मिलती है या नहीं, रेलवे स्टेशन कितनी दूर है, मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट उपलब्ध है या नहीं, डाकघर, जनसेवा केंद्र और परिवहन की क्या स्थिति है। रिपोर्ट में एटीएम, बैंक, सहकारी समिति, पुलिस थाना, ग्राम पंचायत भवन, राशन दुकान, आंगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ता, मंडी, साप्ताहिक हाट, पुस्तकालय, खेल मैदान, सामुदायिक भवन और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की भी जानकारी दर्ज होगी।
बारीकी से होगी हर सुविधा की पड़ताल
जनगणना टीम सबसे पहले गांव और शहर की पहचान दर्ज करेगी। कितने परिवार रहते हैं, कितने टोले या बस्तियां हैं, तहसील और जिला मुख्यालय से कितनी दूरी है और निकटतम शहर कौन सा है, यह सब रिकॉर्ड में शामिल होगा। इसके बाद शिक्षा व्यवस्था की जांच की जाएगी। आंगनवाड़ी से लेकर विश्वविद्यालय तक कितने संस्थान हैं, सरकारी हैं या निजी, यदि गांव में नहीं हैं तो सबसे नजदीकी स्कूल या कॉलेज कितनी दूरी पर है, इसका भी रिकॉर्ड तैयार होगा।
स्वास्थ्य के साथ पानी की हर बूंद और नाली का भी हिसाब
स्वास्थ्य सेवाओं की जांच में यह देखा जाएगा कि गांव में उपस्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अस्पताल, मातृ-शिशु केंद्र, टीबी क्लिनिक, वेलनेस सेंटर, एंबुलेंस, दवा दुकान और पशु चिकित्सालय हैं या नहीं। अस्पताल में कितने बिस्तर, कितने डॉक्टर और कितना पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध है, यह भी दर्ज किया जाएगा। सर्वे में यह भी दर्ज होगा कि गांव में पानी का स्रोत क्या है—नल-जल योजना, हैंडपंप, ट्यूबवेल, कुआं, तालाब, नदी या झरना। गर्मी में पानी मिलता है या नहीं, पूरे साल जल उपलब्ध रहता है या नहीं, नालियां पक्की हैं या कच्ची, कचरा प्रबंधन की व्यवस्था है या नहीं और सामुदायिक शौचालय उपलब्ध हैं या नहीं, इसका भी पूरा ब्योरा लिया जाएगा।
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