
नई दिल्ली । लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस (International Day of Parliamentarism) विश्वभर की संसदों की भूमिका और लोकतांत्रिक मूल्यों को दर्शाता है (Reflects the role of Parliaments Worldwide and Democratic Values) । ओम बिरला ने अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस के अवसर पर देशवासियों, जनप्रतिनिधियों और विश्व की लोकतांत्रिक संस्थाओं को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर अपनी पोस्ट में उन्होंने संसद को लोकतंत्र की आत्मा और जनता की आकांक्षाओं, अधिकारों तथा विश्वास की सर्वोच्च अभिव्यक्ति बताया। ओम बिरला ने कहा, “संसद, जनता की आकांक्षाओं, अधिकारों और विश्वास की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है, जहां विचारों का मंथन होता है, नीतियों का निर्माण होता है और राष्ट्र के भविष्य की दिशा तय होती है। एक सशक्त, स्वतंत्र और उत्तरदायी संसद ही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति तथा नागरिकों के अधिकारों की सबसे बड़ी संरक्षक होती है।” उन्होंने कहा, “विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की संसद ने संविधान की भावना, लोकतांत्रिक परंपराओं और जनप्रतिनिधित्व की गौरवशाली विरासत को सदैव सशक्त किया है। विविधताओं से भरे हमारे देश में संसद राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों का ऐसा मंच है, जहाँ प्रत्येक क्षेत्र, प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक नागरिक की आवाज को स्थान मिलता है।”
बिरला ने कहा, “आज के समय में संसद की भूमिका केवल विधायी कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना, जनहित के मुद्दों पर सार्थक विमर्श को प्रोत्साहित करना, लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना तथा नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन स्थापित करना भी संसद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।” उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस हमें यह अवसर प्रदान करता है कि हम लोकतंत्र की आत्मा – संवाद, सहमति, उत्तरदायित्व, पारदर्शिता और संवैधानिक मर्यादाओं को और अधिक सुदृढ़ करने का संकल्प लें।”
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस हर वर्ष 30 जून को मनाया जाता है। इस दिन वर्ष 1889 में अंतर-संसदीय संघ (इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन – आईपीयू) की स्थापना हुई थी। वर्ष 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस घोषित किया था। इसका उद्देश्य दुनिया भर में संसदों की लोकतंत्र, सुशासन और मानवाधिकारों को मजबूत करने में भूमिका को रेखांकित करना है। अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) को दुनिया की संसदों का वैश्विक मंच माना जाता है। इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है और इसमें 180 से अधिक राष्ट्रीय संसदें सदस्य हैं। यह संगठन लोकतंत्र को मजबूत करने, संवाद और कूटनीति को बढ़ावा देने, शांति और सहयोग को प्रोत्साहित करने तथा संसदों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान का कार्य करता है।
भारत, जो विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, आईपीयू और कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन (सीपीए) का सक्रिय सदस्य है। भारत के सीपीए इंडिया रीजन में भारत की 32 संसदीय एवं विधायी शाखाएं शामिल हैं। अफ्रीका रीजन के बाद, सीपीए में सबसे अधिक सदस्य शाखाएं भारत की हैं। सीपीए इंडिया रीजन को 9 प्रशासनिक जोनों में विभाजित किया गया है। इसका उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र, सुशासन, संवाद और विधायी सहयोग को सुदृढ़ करना है। अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस विश्वभर की संसदों की भूमिका, लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रतिनिधित्व के महत्व को दर्शाता है। यह संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 16.7- ‘सभी स्तरों पर जवाबदेह, समावेशी, भागीदारीपूर्ण और प्रतिनिधि फैसला लेने की प्रक्रिया’—को भी मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
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