
नई दिल्ली । झारखंड (Jharkhand) में भर्ती परीक्षा (RecruitmentExam) में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन (StudentProtest) लगातार नए मोड़ ले रहा है। एक ओर मामले की जांच (Investigation) तेज हो गई है तो दूसरी ओर सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत की संभावनाएं भी बढ़ती दिखाई दे रही हैं। जांच एजेंसी ने इस मामले में पांच और लोगों को गिरफ्तार किया है, जिससे अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़ गई है। लगातार हो रही कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि जांच का दायरा लगातार विस्तृत किया जा रहा है और मामले से जुड़े कई पहलुओं की पड़ताल जारी है।
नई गिरफ्तारियों में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े एक पूर्व अधिकारी के कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी के साथ कुछ अभ्यर्थियों और अन्य व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है। जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और पूछताछ के आधार पर एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आवश्यकता पड़ने पर अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है।
इधर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की मांगों पर बातचीत का संकेत देते हुए कहा है कि सरकार संवाद के लिए पूरी तरह तैयार है और युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी योग्य अभ्यर्थी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा तथा मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री के इस रुख के बाद आंदोलन और सरकार के बीच समाधान की उम्मीदें भी बढ़ी हैं।
हालांकि आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया है कि वे बंद कमरे में बातचीत के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि वार्ता सार्वजनिक रूप से होनी चाहिए या उसका सीधा प्रसारण किया जाए ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। कुछ छात्र नेताओं ने यह भी मांग रखी कि मुख्यमंत्री स्वयं आंदोलन स्थल पर पहुंचकर छात्रों से संवाद करें। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन स्थल पर आमरण अनशन भी जारी है और इसमें शामिल छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है। प्रदर्शनकारी परीक्षा रद्द करने, निष्पक्ष जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए पारदर्शी व्यवस्था और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है। आंदोलन को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक वर्गों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।
उधर आगामी दिनों में प्रस्तावित विधानसभा घेराव को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और एहतियाती कदम उठाए गए हैं ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। सरकार की ओर से भी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रस्तावित वार्ता से कोई ठोस समाधान निकलता है या आंदोलन आगे और तेज होता है।
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