मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर (PoK) में जारी आंदोलन के बीच जम्मू-कश्मीर (J&K) जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने सुरक्षा बलों की नई तैनाती को लेकर पाकिस्तान को चेतावनी दी है। कमेटी के नेता उमर नजीर कश्मीरी ने कहा है कि यदि क्षेत्र में दोबारा सुरक्षा बल भेजे गए तो इसे स्थानीय लोगों पर बाहरी हमला माना जाएगा।
उमर नजीर कश्मीरी के मुताबिक कोटली और कुछ अन्य इलाकों से सुरक्षा बलों के जवान पहले ही पीछे हट चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन जवानों को दोबारा इलाके में भेजा जाता है तो कमेटी इसका विरोध करेगी। उनका कहना है कि किसी एक जिले तक सीमित तैनाती का सवाल नहीं है, बल्कि किसी भी इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजने का विरोध किया जाएगा।
कई महीनों से जारी है JAAC का आंदोलन
PoK में JAAC का आंदोलन कई महीनों से आर्थिक, राजनीतिक और संवैधानिक मांगों को लेकर चल रहा है। संगठन की मांगों में बिजली और अन्य आवश्यक वस्तुओं से जुड़ी राहत, बेहतर शासन व्यवस्था, भ्रष्टाचार की जांच, सामाजिक सेवाओं और बुनियादी ढांचे में सुधार तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
JAAC की प्रमुख मांगों में पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहने वाले जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए क्षेत्रीय विधानसभा में आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना भी शामिल है। संगठन का कहना है कि इन सीटों का असर स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ता है।
जून 2026 के बाद आंदोलन ने फिर जोर पकड़ा। मुजफ्फराबाद, रावलाकोट, मीरपुर और कोटली समेत कई इलाकों में प्रदर्शन हुए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों की भी खबरें सामने आईं। हालांकि, हिंसा और हताहतों की संख्या को लेकर सरकार तथा JAAC के दावों में अंतर रहा है। जुलाई में रावलाकोट की झड़पों में भी संगठन और अधिकारियों की ओर से अलग-अलग दावे किए गए थे।
सरकार ने JAAC पर लगाया प्रतिबंध
आंदोलन के बीच आजाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार ने संगठन पर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाने के आरोप लगाए, जबकि JAAC ने इन आरोपों से इनकार करते हुए अपने आंदोलन को लोगों के अधिकारों से जुड़ा संघर्ष बताया।
प्रतिबंध के बाद संगठन से जुड़े कई नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई। अगस्त में प्रकाशित अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, JAAC के कई प्रवक्ताओं को वांछित सूची में रखा गया था।
नई तैनाती पर बढ़ सकता है तनाव
इसी पृष्ठभूमि में उमर नजीर कश्मीरी की सुरक्षा बलों की संभावित नई तैनाती को लेकर चेतावनी सामने आई है। उनका कहना है कि यदि कोटली या अन्य इलाकों में पहले हटाए गए जवानों को फिर भेजा गया तो इसे क्षेत्र में बाहरी हस्तक्षेप के तौर पर देखा जाएगा और इसका विरोध किया जाएगा।
इससे PoK में केंद्र और स्थानीय प्रशासन के बीच पहले से चले आ रहे तनाव के और बढ़ने की आशंका बन गई है। फिलहाल सुरक्षा बलों की नई तैनाती को लेकर पाकिस्तान सरकार की ओर से किसी नए फैसले की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
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