वाशिंगटन। एस जयशंकर (S. Jaishankar) ने ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में वैश्विक राजनीति और पश्चिम एशिया के हालात को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए ‘एकतरफा दबाव और प्रतिबंधों’ की नीति पर सवाल उठाए और कहा कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय कानून (International Law) की भावना के खिलाफ हैं तथा विकासशील देशों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।
ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि किसी भी तरह के प्रतिबंध या दबाव संवाद और कूटनीति का विकल्प नहीं हो सकते। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक समस्याओं का समाधान बातचीत और आपसी सम्मान के जरिए ही संभव है।
विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर जैसे अहम समुद्री मार्गों का जिक्र करते हुए कहा कि इन रास्तों पर निर्बाध आवाजाही दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।
जयशंकर ने कहा कि शांति और स्थिरता को “चुनिंदा नजरिए” से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सार्वजनिक ढांचे को निशाना न बनाने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्र में तनाव कम करने और स्थिरता बहाल करने के हर प्रयास का समर्थन करेगा।
Gaza Strip में जारी संकट का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति और दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में ठोस पहल की जरूरत बताई। इसके अलावा उन्होंने Lebanon, Syria, Sudan, Yemen और Libya में जारी संकटों का भी उल्लेख किया।
गौरतलब है कि ब्रिक्स देशों की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर अनिश्चितता बढ़ती जा रही है।
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