
जबलपुर। जबलपुर विकास प्राधिकरण यानी जेडीए ने शहर के सुनियोजित विस्तार और विकास के लिए एक नई योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस पूरी प्रक्रिया के तहत जबलपुर के सबसे तेजी से विकसित होने वाले तिलहरी क्षेत्र में लंबे समय से खाली पड़ी निजी जमीनों का सर्वे पूरा कर लिया गया है। प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार इन भूखंडों का वैज्ञानिक तरीके से विकास किए जाने से शहर के बुनियादी ढांचे को नया आयाम मिलेगा। जेडीए ने भूस्वामियों से संपर्क साधने की प्रक्रिया तेज कर दी है ताकि आपसी सहमति या नियमानुसार भूमि अधिग्रहण के जरिए इन जमीनों को विकास परियोजनाओं का हिस्सा बनाया जा सके। बरसात के दौरान जलभराव की समस्या का सामना करने वाले इन क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है जिससे भविष्य में आधुनिक आवासीय और व्यावसायिक बस्तियों का निर्माण किया जा सके। इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई से स्थानीय भूमि बाजार पर भी गहरा प्रभाव पडऩे की संभावना है क्योंकि आम लोग और निवेशक इस पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सहमति की रणनीति तैयार
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए जेडीए सबसे पहले सभी संबंधित भूस्वामियों की पूरी जानकारी एकत्र कर रहा है और उन्हें नियमानुसार प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रहा है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि भूस्वामियों के साथ आपसी सहमति बन जाती है तो बहुत जल्द जमीन का अधिग्रहण कर लिया जाएगा अन्यथा शासन द्वारा निर्धारित नियमों के तहत मुआवजा देकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई भी आधिकारिक और सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है लेकिन अंदरखाने प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां पूरी गति से चल रही हैं। जेडीए का दायरा बढ़ेगा बल्कि शहर के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुनियोजित विकास को भी एक नई और बेहतर गति मिलेगी।
कई तरह की चर्चाएं हवा में
तिलहरी में जेडीए की इस अचानक सक्रियता का सीधा असर अब स्थानीय भूमि बाजार और प्रॉपर्टी के दामों पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। निवेशकों और आम नागरिकों के मन में अब यह बड़ा सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले समय में शहर के अन्य हिस्सों में भी इस तरह की बड़ी एक्टिविटी देखने को मिलेगी। जानकारों का यह भी मानना है कि यदि तिलहरी की यह महत्वाकांक्षी योजना पूरी तरह से सफल साबित होती है तो यह जबलपुर के आगामी शहरी विस्तार की दिशा को पूरी तरह से बदल कर रख देगी। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि जेडीए इस प्रस्ताव को कितनी जल्दी धरातल पर उतारता है और भूस्वामियों के साथ आगे की प्रक्रिया किस रूप में तय होती है।
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