नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में वर्ष 2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुए झीरम घाटी नक्सली हमले (Jhiram Ghati Naxal attack) के मामले में एनआईए (NIA) की विशेष अदालत ने बुधवार को सभी 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी।
अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे अधूरा न्याय बताया। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले से उनकी सोच नहीं बदलेगी, क्योंकि उनके अनुसार हमले के पीछे की कथित राजनीतिक साजिश और सुरक्षा में हुई चूक की पूरी जांच नहीं हुई है। बघेल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि सजा उन लोगों को मिली है जिन्हें उन्होंने नक्सली हमले के “प्यादे” बताया, जबकि उनके अनुसार मुख्य साजिशकर्ता अब भी बाहर हैं।
बघेल ने अपनी पोस्ट में कहा कि झीरम राजनीतिक जनसंहार के मामले में नक्सलियों के पैदल प्यादों को दी गई सजा न अनुपातिक है और न इसे न्याय कहा जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि जिन लोगों ने षडयंत्र रचा और हमले को अंजाम दिया, वे अब भी बाहर हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि नक्सली संगठनों के बड़े नेताओं के नाम और पते एनआईए ने पहले ही हटा दिए थे और उन पर आरोप तक नहीं लगाए गए। उनका यह भी कहना था कि न तो एनआईए ने कथित षडयंत्र की जांच की और न ही जांच आयोग ने इस पहलू की पड़ताल की। बघेल ने भाजपा नेताओं पर भी जांच में लगातार अड़ंगा डालने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले से उनकी सोच बदलने का सवाल ही नहीं है। उनके मुताबिक न्याय अभी भी अधूरा है, क्योंकि जांच अधूरी है।
#WATCH | Ambikapur | On NIA Special Court awarding the death penalty to all 10 convicted persons in the Jhiram Ghati massacre case, Former Chhattisgarh CM and Congress leader TS Singh Deo says, “…These death sentences do not answer the questions surrounding why security was not… pic.twitter.com/SHlFcpw0QI
— ANI (@ANI) September 16, 2026
सिंहदेव ने भी उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता टी.एस. सिंहदेव ने भी अदालत के फैसले के बाद कुछ सवालों के अनुत्तरित रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि मौत की सजा उन सवालों का जवाब नहीं देती कि परिवर्तन यात्रा के तीसरे दिन सुरक्षा क्यों नहीं दी गई।
सिंहदेव के मुताबिक यात्रा के कार्यक्रम और सुरक्षा को लेकर सरकार और प्रशासन को डीजीपी कार्यालय से लेकर जिला और संभागीय मुख्यालय तक लिखित जानकारी दी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि पहले दो दिनों में इसी कार्यक्रम के तहत पूरी सुरक्षा उपलब्ध कराने के बाद तीसरे दिन, जिस दिन हमला हुआ, रास्ते में रोड-ओपनिंग पार्टी और सुरक्षा की स्पष्ट व्यवस्था क्यों नहीं थी।
उन्होंने कहा कि आने-जाने के दौरान सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराने के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान नहीं की गई और न ही उन्हें जवाबदेह ठहराया गया। सिंहदेव ने कहा कि जब तक घटना की पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक मृतकों के परिवारों को तसल्ली नहीं मिलेगी और वह स्वयं भी संतुष्ट नहीं होंगे।
25 मई 2013 को दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सलियों ने हमला किया था। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कई प्रमुख नेताओं की मौत हुई थी।
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