
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 (Uttar Pradesh Assembly Elections 2027) से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस (Congress) के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत तेज हो गई है। कांग्रेस 100 से अधिक सीटों पर दावा कर रही है, जबकि सपा (SP) की ओर से संकेत है कि सीटों का फैसला केवल संख्या के आधार पर नहीं होगा। पार्टी उम्मीदवार की मजबूती, स्थानीय राजनीतिक समीकरण और जीत की संभावनाओं को आधार बनाने की तैयारी में है। इसी बीच कांग्रेस को 45 से 50 सीटों तक सीमित रखने की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि, सीटों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग फॉर्मूले बताए गए हैं और अंतिम समझौता अभी तय नहीं है।
कांग्रेस का 100 से ज्यादा सीटों पर दावा
उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनाव आयोग की तैयारियां चल रही हैं और दोनों दलों ने भी विधानसभा स्तर पर संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस की ओर से 100 से अधिक सीटों की मांग की जा रही है। पार्टी 2017 के सपा-कांग्रेस गठबंधन का हवाला देते हुए अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग कर रही है। हाल की रिपोर्टों में कांग्रेस की ओर से 105 से 120 सीटों तक की मांग का उल्लेख है।
वहीं सपा की रणनीति सीटों की संख्या के बजाय संभावित उम्मीदवारों और सीटवार समीकरण को महत्व देने की बताई जा रही है। पार्टी नेतृत्व की ओर से यह संकेत दिया गया है कि कांग्रेस जिन सीटों पर दावा कर रही है, वहां उसे अपने मजबूत उम्मीदवारों का ब्योरा देना होगा। उम्मीदवार की स्थिति, स्थानीय समीकरण और जीत की संभावनाओं को देखकर सीट तय करने की बात कही जा रही है।
2022 में सपा को मिली थीं 111 सीटें
2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने 111 सीटों पर जीत दर्ज की थी। उस समय सपा के गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने 8 और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने 6 सीटें जीती थीं। बाद में दोनों दल सपा से अलग हो गए। कांग्रेस का प्रदर्शन 2022 में सीमित रहा और पार्टी को सिर्फ दो सीटों पर जीत मिली थी।
सपा नेतृत्व का तर्क है कि गठबंधन के लिए हर विधानसभा सीट महत्वपूर्ण है। ऐसे में ऐसी सीट पर कमजोर उम्मीदवार उतारना, जहां जीत की संभावना कम हो, गठबंधन के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसी वजह से उम्मीदवार की ताकत और स्थानीय समीकरण को सीट बंटवारे का आधार बनाने की बात सामने आ रही है।
2017 के फॉर्मूले का हवाला दे रही कांग्रेस
कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन के दौरान पार्टी ने 100 से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। इसी आधार पर कांग्रेस इस बार भी बड़ी संख्या में सीटों की मांग कर रही है। हालांकि, 2017 का गठबंधन सत्ता हासिल नहीं कर सका था।
वर्तमान में दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर मतभेद बने हुए हैं। सितंबर की हालिया रिपोर्टों में कांग्रेस की ओर से करीब 105 सीटों की मांग और सपा की ओर से 60 से 70 सीटों के संभावित फॉर्मूले की बात सामने आई है। इससे स्पष्ट है कि 45-50 सीट का आंकड़ा अभी एक रिपोर्टेड प्रस्ताव/चर्चा का हिस्सा है, अंतिम सीट बंटवारा नहीं।
राजभर-निषाद के साथ गठजोड़ के प्रस्ताव पर भी सख्ती
इस बीच सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी प्रमुख संजय निषाद को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। दोनों उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और उनके दल एनडीए का हिस्सा हैं। समय-समय पर दोनों के एनडीए से अलग होने की अटकलें सामने आती रही हैं।
सपा के एक प्रमुख रणनीतिकार के हवाले से दावा किया गया है कि पार्टी नेतृत्व ने पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस मामले में स्पष्ट संदेश दिया है। कथित तौर पर सुभासपा या निषाद पार्टी से गठजोड़ का प्रस्ताव रखने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की बात कही गई है। यह दावा संबंधित सपा रणनीतिकार के हवाले से है; इसे पार्टी का औपचारिक सार्वजनिक निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।
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