वाशिंगटन/बीजिंग। अमेरिका और चीन (America and China) के बीच मीडिया और पत्रकारों को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ से जुड़े एक पत्रकार का वीजा रद्द कर दिया है। यह कदम चीन द्वारा न्यूयॉर्क टाइम्स की पत्रकार विवियन वांग को देश छोड़ने के आदेश दिए जाने के बाद उठाया गया बताया जा रहा है।
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने यह कार्रवाई चीन के हालिया फैसले के जवाब में की है। हालांकि दोनों सरकारों की ओर से इस मुद्दे पर विस्तृत सार्वजनिक टिप्पणी सीमित रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद की पृष्ठभूमि में एक अंतरराष्ट्रीय कारोबारी सम्मेलन के दौरान प्रसारित ताइवान के राष्ट्रपति का रिकॉर्डेड साक्षात्कार है। कार्यक्रम के दौरान ताइवान की राजनीतिक स्थिति को लेकर की गई कुछ टिप्पणियों पर चीन ने आपत्ति जताई थी।
चीन लंबे समय से ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान की लोकतांत्रिक सरकार स्वयं को अलग प्रशासनिक इकाई के रूप में संचालित करती है। इसी संवेदनशील मुद्दे को लेकर बीजिंग और वाशिंगटन के बीच समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं।
चीन ने न्यूयॉर्क टाइम्स की पत्रकार विवियन वांग को देश छोड़ने का निर्देश दिया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित कार्यक्रम में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी, फिर भी उन्हें इस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। इस फैसले की प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े संगठनों और मीडिया संस्थानों ने आलोचना की है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के वरिष्ठ संपादकीय अधिकारियों ने पत्रकार को निष्कासित किए जाने के फैसले पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे चीन से स्वतंत्र और प्रत्यक्ष रिपोर्टिंग करना और अधिक कठिन हो सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी पत्रकारों की सीमित पहुंच से दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और राजनीतिक घटनाक्रमों की जमीनी जानकारी प्राप्त करने में बाधाएं बढ़ सकती हैं।
विदेशी पत्रकार संगठनों के अनुसार, अमेरिका और चीन के बीच पत्रकारों के वीजा, मान्यता और कामकाज की शर्तों को लेकर पिछले कुछ वर्षों से तनाव बना हुआ है। दोनों देशों ने समय-समय पर एक-दूसरे के मीडिया प्रतिनिधियों पर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पत्रकारों से जुड़े हालिया फैसले केवल मीडिया विवाद नहीं हैं, बल्कि वे व्यापक रणनीतिक और कूटनीतिक प्रतिस्पर्धा का भी हिस्सा बनते जा रहे हैं। ऐसे में यह मामला दोनों देशों के संबंधों में बढ़ते अविश्वास का एक और संकेत माना जा रहा है।
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