
नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के भीतर चल रही खींचतान के बीच आमडांगा विधानसभा क्षेत्र (Amdanga Assembly Constituency) के विधायक कासेम सिद्दीकी (Kasem Siddiqui) ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे में वापसी की घोषणा की है। बागी गुट से अलग होने के बाद सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के प्रति अपनी निष्ठा जताई और कहा कि उनके लिए दीदी ही सब कुछ हैं।
कासेम सिद्दीकी की वापसी ऐसे समय में हुई है जब विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर मतभेद सामने आए हैं। पार्टी के कई विधायकों के बागी गुट के साथ जाने की चर्चा के बीच सिद्दीकी का वापस ममता के खेमे में आना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सिद्दीकी ने बागी गुट से अलग होने की वजह बताते हुए कहा कि उन्हें कुछ अलग जानकारी देकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए थे। उनके अनुसार उन्हें बताया गया था कि हस्ताक्षर ममता बनर्जी तक पहुंचाए जाएंगे और बागी गुट भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में ही काम करेगा।
हालांकि बाद में जब उन्होंने उस गुट की गतिविधियों को देखा तो उन्हें वहां TMC प्रमुख के नेतृत्व का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने बागी खेमे से दूरी बनाने का फैसला किया। सिद्दीकी ने अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि वह ममता बनर्जी के साथ ही रहेंगे।
सिद्दीकी के बयान के अनुसार उन्हें विधानसभा चुनाव में पार्टी की ओर से टिकट मिला था और उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान जनता के सामने ममता बनर्जी की तस्वीर और नेतृत्व को प्रमुखता से रखा गया था। उनके मुताबिक मतदाताओं ने भी इसी राजनीतिक नेतृत्व पर भरोसा जताया।
कासेम सिद्दीकी की राजनीतिक पहचान केवल विधायक के तौर पर नहीं है। उन्हें फुरफुरा शरीफ से जुड़े पीरजादा के रूप में भी जाना जाता है और मुस्लिम समुदाय के बीच उनका प्रभाव माना जाता है। पिछले वर्ष वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे। इसके बाद पार्टी ने उन्हें संगठन में राज्य महासचिव की जिम्मेदारी दी थी।
विधानसभा चुनाव में उन्हें उत्तर 24 परगना जिले की आमडांगा सीट से पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया था। चुनाव जीतने के बाद वह विधानसभा पहुंचे। अब बागी गुट छोड़कर ममता बनर्जी के साथ लौटने के उनके फैसले को पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि कासेम सिद्दीकी की वापसी के बावजूद तृणमूल कांग्रेस के भीतर विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। पार्टी के अलग-अलग गुट संगठनात्मक गतिविधियों और कार्यक्रमों को लेकर आमने-सामने हैं। छात्र संगठन के स्थापना दिवस को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आए हैं।
28 अगस्त को मेयो रोड पर गांधी प्रतिमा के पास तृणमूल छात्र परिषद का स्थापना दिवस मनाने को लेकर दोनों गुटों ने अनुमति के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले कालीघाट गुट ने पारंपरिक स्थल पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति के लिए अदालत से तत्काल सुनवाई की मांग की है।
मामले में जल्द सुनवाई की मांग स्वीकार कर ली गई है और अदालत में मंगलवार को सुनवाई होनी है। तृणमूल कांग्रेस हर वर्ष मेयो रोड पर छात्र शाखा का स्थापना दिवस आयोजित करती रही है, लेकिन इस बार पार्टी के भीतर जारी विभाजन के कारण कार्यक्रम को लेकर विवाद बढ़ गया है।
कासेम सिद्दीकी की घर वापसी ऐसे दौर में हुई है जब तृणमूल कांग्रेस को अपने संगठन के भीतर एकजुटता बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। उनका ममता बनर्जी के साथ खड़े होने का फैसला पार्टी के भीतर चल रही शक्ति-खींचतान के बीच एक नया राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि और कितने नेता या विधायक बागी खेमे से अलग होकर ममता बनर्जी के नेतृत्व में वापस आते हैं।
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