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केरलम : CM का ‘ब्राह्मण फैक्टर’, आखिर OBC की बात कैसे बढ़ा पाएंगे राहुल गांधी?

May 12, 2026

नई दिल्ली. कांग्रेस (Congress) की मुश्किलें खत्म होने का नाम ही नहीं लेतीं. देश की राजनीति में बीजेपी (BJP) के विस्तार के आगे सिमटते जाना भी शायद कांग्रेस की उतनी बड़ी मुश्किल नहीं है. और, शायद लगातार चुनाव हार का सिलसिला. कांग्रेस के सामने मुश्किल तब भी खड़ी हो जाती है, जब चुनाव जीतने के बाद किसी राज्य में सरकार बनानी होती है.

कांग्रेस की सबसे बड़ी मुश्किल मुख्यमंत्री (CM) पद के लिए नेता का चुनाव हो जा रहा है. कर्नाटक का बवाल ताजा मिसाल है. बीते दिनों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ऐसी मुश्किलें भी देखी जा चुकी हैं, और अंजाम भी – अब केरलम की बारी है.

केरल के मुख्यमंत्री बनने की रेस मे तीन नाम सबसे ऊपर हैं. केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन और रमेश चेन्नीथला. तीनों की अपनी अपनी खासियत है. रमेश चेन्नीथला सबसे सीनियर नेता हैं. वीडी सतीशन को बीते पांच साल में केरल में कांग्रेस को मजबूत करने का श्रेय मिला है – और, केसी वेणुगोपाल गांधी परिवार के करीबी बताए जाते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए केसी वेणुगोपाल कांग्रेस नेतृत्व की पहली पसंद बताए जाते हैं.


  • तीनों नेताओं की उम्र में कोई ज्यादा फासला तो नहीं है, लेकिन जातीय समीकरण में तीनों एक ही छोर पर नजर आते हैं. केसी वेणुगोपाल 63 साल के हैं. वीडी सतीशन 62 साल के और रमेश चेन्नीथला 70 साल के होने जा रहे हैं. ये तीनों ही नेता नायर समुदाय से आते हैं, जो केरलम में सवर्ण होते हैं. नायर समुदाय केरल की आबादी का करीब 12 फीसदी हैं.

    जातीय समीकरणों में कहां फिट हो रहे हैं कांग्रेस उम्मीदवार
    कांग्रेस नेता राहुल गांधी करीब तीन साल से ओबीसी समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व देने का मसला जोर शोर से उठाते रहे हैं. राहुल गांधी केंद्र सरकार में तैनात ओबीसी समुदाय से आने वाले सचिवों पर भी सवाल खड़ा कर चुके हैं. और, जहां कहीं भी प्रसंग आता है, राहुल गांधी ओबीसी समुदाय के हक का मामला उठाना नहीं भूलते.

    केरलम के मामले में कांग्रेस का ये एजेंडा पीछे छूटता नजर आता है. हो सकता है, बैलेंस करने का कोई प्लान हो, और उसके हिसाब से उपाय भी खोजे जाएं, लेकिन मुख्यमंत्री पद के मामले में तो ओबीसी की बहस अपने आप अप्रासंगिक हो जाती है.

    फिलहाल तो स्थिति यही है कि कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के तीनों दावेदारों में से कोई भी ओबीसी नहीं है. रमेश चेन्निथल्ला, वीडी सतीशन और केसी वेणुगोपाल सभी नायर समुदाय से आते हैं. नायर यानी सवर्ण समाज.

    10 साल तक केरल के मुख्यमंत्री रहे पिनाराई विजयन इड़ावा समुदाय से आते हैं. इड़ावा समुदाय केरलम का बड़ा ओबीसी समुदाय है – कांग्रेस जातीय समीकरणों का संतुलन कैसे बना पाती है. ऐसे में इस बार कांग्रेस के सामने सामाजिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है.

    1957 से अब तक केरलम में 12 मुख्यमंत्री बने हैं, जिनमें 9 हिंदू रहे हैं. जातीय आधार पर देखें तो 6 सवर्ण तबके से और उनमें भी 5 नायर समुदाय से, जबकि एक ब्राह्मण वर्ग से. केरलम के 3 मुख्यमंत्री ओबीसी समुदाय से रहे हैं. केरलम में दो ईसाई मुख्यमंत्री भी हुए हैं, एके एंटनी और ओमन चांडी. दोनों ही कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे हैं. एक मुस्लिम मुख्यमंत्री भी केरलम को मिला है, सीएच मोहम्मद कोया, जो IUML से थे.

    केरल की राजनीति में जातियों का संतुलन हमेशा ही महत्व रखता आया है. केरलम की करीब 54.73 फीसदी आबादी हिंदू है. हिंदुओं में भी 14.90 फीसदी नायर हैं, जबकि 21.60 फीसदी इड़ावा हैं. करीब 26.56 फीसदी मुस्लिम और 18 फीसदी ईसाई समुदाय के लोग हैं. चुनावों में सभी की अपनी अलग भूमिका होती.

    SNDP योगम और नायर सर्विस सोसाइटी जैसे समूह केरलम में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करते रहे हैं – लेकिन, वीडी सतीशन ने ऐसे संगठनों से समर्थन लेने से परहेज किया, जिसे जोखिमभरा माना गया. फिर भी, वीडी सतीशन ने टकराव के बजाए संतुलन की रणनीति अपनाई, और नतीजा सामने है.

    मुख्यमंत्री पद की रेस में वीडी सतीशन से केसी वेणुगोपाल आगे माने जा रहे हैं. केरल के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के वीडी सतीशन के समर्थन में प्रदर्शन से कांग्रेस आलाकमान नाराज है. केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से 15 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

    वेणुगोपाल बनाम सतीशन
    हाई कमान अपनी जगह है. हाई कमान का फैसला ही लागू भी होगा. लेकिन, वीडी सतीशन ने भी नेतृत्व को साफ कर दिया है कि किसी भी सूरत में वो मुख्यमंत्री पद के लिए केसी वेणुगोपाल का समर्थन नहीं करने जा रहे हैं – और कांग्रेस के लिए यह सबसे बड़े खतरे की घंटी है, जो मुख्यमंत्री का नाम फाइनल होने के पहले से ही बजने लगी है.

    केरलम में विधायकों की राय जानने के लिए सीनियर नेताओं अजय माकन और मुकुल वासनिक को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था. दिल्ली में केरलम के मुख्यमंत्री का नाम फाइनल करने को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर नेताओं की बैठक बुलाई गई थी. सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि बैठक से पहले राहुल गांधी ने केसी वेणुगोपाल से अलग से मुलाकात की. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के खिलाफ जो पोस्टर लगाए गए थे, और आरोप है कि यह काम कांग्रेस नेता वीडी सतीशन के समर्थन से ही हुआ था.

    रिपोर्ट के मुताबिक, जब वीडी सतीशन मीटिंग में पहुंचे तो राहुल गांधी ने उनसे उनके खिलाफ लगे आरोपों के बारे में पूछा भी. बताते हैं, वीडी सतीशन ने यह स्वीकार भी किया कि वो केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाए जाने के खिलाफ हैं.

    मालूम हुआ है कि, सूत्रों के हवाले से, वीडी सतीशन ने अपने रुख के समर्थन में तर्क भी दिए. वीडी सतीशन का आरोप है कि कांग्रेस महासचिव होने के नाते केसी वेणुगोपाल विधायकों पर दबाव डालकर गुट और खेमे बना रहे थे. वीडी सतीशन ने साफ किया कि अपने फायदे के लिए कभी उन्होंने गुटबाजी नहीं की, और केरलम में विपक्ष के नेता के रूप में काम करते समय सभी को साथ लेकर चले.

    राहुल गांधी ने मीटिंग में सबको साफ कर दिया कि कांग्रेस अपने फैसले खुद लेगी, और इस मामले में किसी और को दखल देने की जरूरत नहीं है. जाहिर है, राहुल गांधी का आशय दबाव बनाने के लिए पोस्टर और प्रदर्शन को लेकर था.

    राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे दोनों एक राय थे कि सड़क पर हुई लड़ाइयों ने पार्टी को शर्मिंदा किया है, और यह उन लोगों के जनादेश को चुनौती देने जैसा है जिन्होंने कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ को वोट दिया था.

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