
बीजिंग। वैश्विक खाद्य और उर्वरक संकट के बीच चीन एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। वर्ल्ड बैंक के पूर्व अध्यक्ष डेविड मालपास ने चीन पर खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की जमाखोरी करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उसे तुरंत अपने भंडार बढ़ाने का काम बंद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे दुनिया भर में पैदा हुए सप्लाई संकट को कम करने में मदद मिल सकती है। डेविड मालपास ने यह बयान BBC वर्ल्ड सर्विस के ‘वर्ल्ड बिजनेस रिपोर्ट’ कार्यक्रम में दिया।
बता दें कि मालपास 2019 से 2023 तक वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले वह 2017 से 2019 तक अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में ट्रेजरी अंडर सेक्रेटरी फॉर इंटरनेशनल अफेयर्स भी रह चुके हैं। बीजिंग में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शिखर बैठक से ठीक पहले हुई बातचीत में मालपास ने कहा, ‘चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य और उर्वरक भंडार है। उसे अपने स्टॉक लगातार बढ़ाना बंद करना चाहिए।’
दरअसल, ईरान युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ा है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से उर्वरक की खेपों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे में दुनिया के कई देश वसंतकालीन बुवाई से पहले उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटे हुए हैं। इसी बीच चीन ने मार्च से कई प्रकार के उर्वरकों के निर्यात पर रोक लगा दी है। चीन का कहना है कि वह घरेलू जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठा रहा है। हालांकि, चीन 2021 से ही धीरे-धीरे उर्वरक निर्यात पर कई तरह की पाबंदियां लगाता आ रहा है।
पिछले साल वैश्विक उर्वरक उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत रही थी। वहीं, उसके उर्वरक निर्यात का कुल मूल्य 13 अरब डॉलर से अधिक रहा। मालपास ने चीन के ‘विकासशील देश’ होने के दावे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘चीन खुद को विकासशील देश बताता है, जबकि वह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और कई मायनों में समृद्ध देश बन चुका है। इसके बावजूद चीन अब भी विश्व व्यापार संगठन और वर्ल्ड बैंक में विकासशील देश होने का दावा करता है। अब उसे इस स्थिति को छोड़ देना चाहिए।’
हालांकि, चीन ने इन आरोपों को खारिज किया है। वॉशिंगटन डीसी स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंगयू ने BBC को ईमेल के जरिए भेजे बयान में कहा, ‘चीन वैश्विक खाद्य और उर्वरक बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। दुनिया में खाद्य और उर्वरक सप्लाई चेन में जो संकट पैदा हुआ है, उसके असली कारण सबको पता हैं। इसका दोष चीन पर नहीं मढ़ा जा सकता। चीन को दुनिया का सबसे बड़ा विकासशील देश माना जाता है और इसके पीछे पर्याप्त तथ्य मौजूद हैं। विकासशील देश का दर्जा बनाए रखना चीन का वैध अधिकार है।’
ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर भी मालपास ने चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘किसी अस्थिर देश के पास प्लूटोनियम नहीं होना चाहिए और होर्मुज जलडमरूमध्य को भी बंद नहीं किया जाना चाहिए।’ हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि चीन इस संकट के समाधान में भूमिका निभा सकता है। मालपास ने कहा, ‘दुनिया भर में खुले समुद्री रास्तों से चीन को बड़ा आर्थिक फायदा होता है। चीन शिपिंग लाइनों का संचालन करता है, कंटेनरों का मालिक है और वैश्विक व्यापार से भारी मुनाफा कमाता है। अगर ईरान किसी तरह होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण करता है, तो चीन को भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।’
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