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बर्थ-डेथ सर्टिफिकेट बनाने में लुढ़का मध्य प्रदेश

July 17, 2026

  • 1 साल बाद खुली 5.50 लाख से ज्यादा मां-बाप की नींद

भोपाल। मध्य प्रदेश में बर्थ रजिस्ट्रेशन को पेरेंट्स और सरकारी अधिकारी कितने जागरुक हैं, इसका खुलासा नागरिक पंजीकरण प्रणाली यानि सीआरएस 2024 की रिपोर्ट में हुआ है। दरअसल, निर्धारित जन्म के 21 दिनों की समय सीमा में बर्थ रजिस्ट्रेशन कराने का नियम है। इस अंतराल में बर्थ रजिस्टर्ड कराने पर कोई अतिरिक्त राशि नहीं चुकानी पड़ती और पंजीयन भी निशुल्क होता है। जबकि 21 दिन बाद पेनाल्टी और अस्पताल के दस्तावेजों के अलावा अन्य प्रमाण पत्र भी लगते हैं। साथ ही पेरेंट्स को लंबे समय तक अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।


  • वहीं मध्य प्रदेश समेत पूरे देश में नवजात बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनावाना काफी सरल है। बावजूद इसके 21 दिन के भीतर नवजात बच्चों को बर्थ सर्टिफिकेट मुहैया कराने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश 66.2 प्रतिशत की दर के साथ 24वें पायदान पर है। झारखंड और बंगाल समेत कई राज्यों की स्थिति मध्य प्रदेश से काफी बेहतर है। राष्ट्रीय स्तर पर जन्म पंजीकरण की सूची पर नजर डालें तो गुजरात 99.9 प्रतिशत बर्थ रजिस्ट्रेशन की दर के साथ देश में सबसे आगे है। वहीं पुडुचेरी 99.6 प्रतिशत और चंडीगढ़ 99.2 प्रतिशत के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर है। दक्षिण भारतीय राज्यों की बता करें तो तमिलनाडु में 98.2 प्रतिशत और केरल में 96.3 प्रतिशत बर्थ रजिस्ट्रेशन नवजात के जन्म के 21 दिन के भीतर हो रहा है। इसके उलट मध्य प्रदेश इस सूची में काफी नीचे यानि 24वें स्थान पर खिसक गया है। साल 2024 की के आंकड़ों की बात करें तो मध्य प्रदेश में कुल 19,96,172 पंजीकृत जन्मों में से केवल 13,20,682 जन्म ही 21 दिनों के भीतर दर्ज हो सके।

    छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से भी पिछड़ा मध्य प्रदेश
    मध्य प्रदेश इस मामले में अपने पड़ोसी राज्यों से भी पिछड़ गया है। छत्तीसगढ़ में 21 दिनों के भीतर जन्म पंजीकरण का आंकड़ा 77.4 प्रतिशत है। वहीं महाराष्ट्र 79.3 प्रतिशत के साथ मध्य प्रदेश से काफी बेहतर स्थिति में है। वहीं एमपी केवल उत्तर प्रदेश (64.7 प्रतिशत) और राजस्थान (63.1 प्रतिशत) जैसे राज्यों से थोड़ा सा ही आगे है। सीआरएस 2024 की रिपोर्ट में टाइम गैप इन बर्थ रजिस्ट्रेशन के आंकड़े भी प्रदेश की लापरवाही को उजागर करते हैं। बता दें कि मध्य प्रदेश में 21 दिन बीत जाने के बाद भी एक बहुत बड़ा वर्ग सालों तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराता है। आंकड़ों के अनुसार 21 से 30 दिनों के भीतर एक साल में मध्य प्रदेश में 13,20,682 नवजात का जन्म पंजीयन किया गया। जबकि 29,993 नवजात का जन्म 21 से 30 दिनों के अंतराल में हुआ। वहीं 30 दिनों से लेकर 1 वर्ष के भीतर 88,153 बच्चों का पंजीकरण हुआ। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 5,57,344 बच्चों का जन्म पंजीकरण एक साल बीत जाने के बाद कराया गया। यानी लाखों लोग बच्चे के जन्म के एक साल बाद प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर रहे हैं।

    एमपी में साढ़े 5 लाख और गुजरात में केवल 86 ने किया आवेदन
    जिला चिकित्सालय भोपाल से रिटायर्ड अधीक्षक डॉ. आईके चुघ के अनुसार अगर हम गुजरात और मध्य प्रदेश के आंकड़ों की सीधी तुलना करें, तो सिस्टम का अंतर साफ नजर आता है। गुजरात में जहां 11,19,753 कुल जन्मों में से 11,19,030 का पंजीकरण 21 दिनों में हो गया, वहीं एक साल बाद पंजीकरण कराने वालों की संख्या महज 86 रही। इसके उलट मध्य प्रदेश में एक साल बाद पंजीकरण कराने वालों की संख्या (5.57 लाख से अधिक) बहुत बड़ी है। यह आंकड़ा दिखाता है कि गुजरात का प्रशासनिक ढांचा जन्म के तुरंत बाद पंजीकरण को लेकर कितना चुस्त है, जबकि प्रदेश में इस व्यवस्था को बड़े सुधार की जरूरत है। एक साल से अधिक की देरी से जन्म पंजीकरण कराने के मामले में बिहार देश में सबसे ऊपर है, जहां 16,46,526 बच्चों का पंजीकरण एक साल बाद हुआ। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 13,40,041 मामले ऐसे रहे। मध्य प्रदेश 5,57,344 मामलों के साथ इस सूची में भी देश के सबसे सुस्त राज्यों की कतार में खड़ा दिखाई देता है।

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