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प्रदेश के सभी बांधों पर 24 घंटे निगरानी

July 17, 2026

  • कारम और राजा बांध हादसों से सबक; जल संसाधन विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश, इंजीनियर रहेंगे हाई अलर्ट पर

भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून के दौरान बांधों की सुरक्षा को लेकर जल संसाधन विभाग ने इस बार अभूतपूर्व सतर्कता बरतने का फैसला किया है। वर्ष 2022 में धार जिले के कारम डैम टूटने और पिछले वर्ष मैहर के राजा बांध में आई तकनीकी समस्या से सबक लेते हुए विभाग ने सभी इंजीनियरों को 24 घंटे हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। स्पष्ट कर दिया गया है कि बारिश के पूरे सीजन में बांधों के संचालन और सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग के अनुसार, मानसून के दौरान जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ता और बदलता है। ऐसे में छोटी-सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए सभी फील्ड इंजीनियरों को बांधों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और हर स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।



  • निर्देशों के मुताबिक इंजीनियर केवल कार्यालय से निगरानी नहीं करेंगे, बल्कि स्वयं मौके पर पहुंचकर बांधों की दीवारों, गेटों, स्पिलवे (जल निकासी मार्ग) और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं का नियमित निरीक्षण करेंगे। विशेष रूप से पुराने बांधों और उन परियोजनाओं पर अतिरिक्त निगरानी रखने को कहा गया है, जहां पहले किसी प्रकार की तकनीकी समस्या सामने आ चुकी है। बांधों के आसपास जमा मलबा, झाडय़िां और अन्य अवरोध हटाकर जल निकासी को सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं दरार, रिसाव, मिट्टी का कटाव या किसी भी प्रकार की संरचनात्मक कमजोरी दिखाई देती है तो उसकी तत्काल सूचना मुख्यालय को देकर मरम्मत कार्य शुरू करना अनिवार्य होगा।

    पानी छोडऩे में नहीं होगी जल्दबाजी
    जल संसाधन विभाग ने इंजीनियरों को निर्देश दिए हैं कि जलाशयों से पानी की निकासी पूरी तरह वैज्ञानिक मानकों और बांध की निर्धारित क्षमता के अनुरूप ही की जाए। अचानक भारी बारिश की स्थिति में अलर्ट सिस्टम को तत्काल सक्रिय करना होगा, ताकि नीचे बसे गांवों और प्रशासन को समय रहते सूचना मिल सके। विभाग चाहता है कि जल प्रबंधन में किसी प्रकार की जल्दबाजी या मानवीय भूल से बचा जाए।

    हर बांध के लिए तैयार किया गया इमरजेंसी एक्शन प्लान
    इस वर्ष विभाग ने प्रदेश के प्रत्येक बांध के लिए अलग-अलग इमरजेंसी एक्शन प्लान तैयार किया है। इस योजना में शामिल हैं-संभावित खतरे की स्थिति में आसपास के गांवों को समय पर चेतावनी देना। जरूरत पडऩे पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था। बचाव एवं राहत कार्यों के लिए मशीनरी और संसाधनों की अग्रिम तैयारी। जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ समन्वय। साथ ही, 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित करने के लिए इंजीनियरों की ड्यूटी रोटेशन के आधार पर तय कर दी गई है, ताकि हर समय प्रशिक्षित अधिकारी मौके पर उपलब्ध रहें।

    अधूरे मरम्मत कार्य तत्काल पूरे करने के निर्देश
    विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन बांधों में मरम्मत, पेंटिंग या अन्य रखरखाव संबंधी कार्य अभी अधूरे हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए। अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि यदि किसी प्रकार की लापरवाही या समय पर कार्रवाई न करने के कारण दुर्घटना होती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

    अब एप से होगी लाइव मॉनिटरिंग
    इस बार जल संसाधन विभाग ने तकनीक का भी व्यापक उपयोग शुरू किया है। सभी इंजीनियरों को रोजाना बांधों का जलस्तर, वर्षा की मात्रा और पानी की निकासी से संबंधित जानकारी डिजिटल एप और ऑनलाइन रिपोर्टिंग सिस्टम के माध्यम से सीधे भोपाल मुख्यालय भेजनी होगी। इससे प्रदेश स्तर पर हर बांध की स्थिति की रियल टाइम निगरानी संभव होगी और आवश्यकता पडऩे पर तुरंत निर्णय लिए जा सकेंगे।

    मौसम विभाग और स्थानीय लोगों से रहेगा समन्वय
    विभाग ने इंजीनियरों को भारतीय मौसम विभाग से लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि भारी वर्षा या बाढ़ जैसी संभावित परिस्थितियों की अग्रिम जानकारी मिल सके। साथ ही स्थानीय प्रशासन, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर संवाद बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है, जिससे किसी भी संभावित खतरे की सूचना समय रहते मिल सके और नुकसान को टाला जा सके।

    कारम और राजा बांध हादसों की पुनरावृत्ति रोकना सबसे बड़ी चुनौती
    धार जिले में वर्ष 2022 में कारम डैम टूटने की घटना और पिछले वर्ष मैहर के राजा बांध में आई तकनीकी समस्या ने प्रदेश में बांध सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इन्हीं घटनाओं को ध्यान में रखते हुए जल संसाधन विभाग इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। विभाग की कोशिश है कि लगातार निगरानी, तकनीकी सतर्कता, आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम और त्वरित आपदा प्रबंधन के जरिए मानसून के पूरे सीजन में प्रदेश के सभी बांध पूरी तरह सुरक्षित बने रहें।

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