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UAE का पाकिस्तान पर बड़ा एक्शन: हजारों पाकिस्तानी कामगार अचानक डिपोर्ट, कूटनीतिक तनाव से बढ़ी मुश्किलें

May 10, 2026

 

नई दिल्ली(New Delhi)। अमेरिका और ईरान(United States and Iran) के बीच जारी तनाव(ongoing tensions) के बीच(between) मध्यस्थता की भूमिका निभाने की पाकिस्तान(Pakistan’s attempt) की कोशिश अब उसके लिए बड़ी परेशानी बनती नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसी कूटनीतिक रुख(diplomatic stance) और क्षेत्रीय मुद्दों पर पाकिस्तान की स्थिति(Pakistan’s position को लेकर संयुक्त अरब अमीरात(United Arab Emirates) (UAE) के साथ उसके संबंधों (relations)में खटास(regional issues) आ गई है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के हफ्तों में यूएई (UAE) ने हजारों पाकिस्तानी कामगारों, खासकर शिया समुदाय से जुड़े लोगों को अचानक देश से डिपोर्ट कर दिया है। कई मामलों में आरोप है कि इन लोगों को बिना कोई स्पष्ट कारण बताए हिरासत में लिया गया और बाद में देश से निकाल दिया गया।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि यूएई(UAE) इस बात से नाराज है कि पाकिस्तान ने हालिया क्षेत्रीय घटनाओं और ईरान से जुड़े विवादों पर अपेक्षित कड़ा रुख नहीं अपनाया। इसी नाराजगी को इस बड़े फैसले की वजह माना जा रहा है। हालांकि, यूएई(UAE) की तरफ से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है और पाकिस्तान ने भी सामूहिक डिपोर्टेशन के आरोपों को खारिज किया है।

स्थानीय समुदाय संगठनों का कहना है कि इन कार्रवाइयों का सबसे ज्यादा असर पाकिस्तानी शिया समुदाय पर पड़ा है, जिनके ईरान के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध बताए जाते हैं। अनुमान के अनुसार, मध्य अप्रैल के बाद से हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं।

इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। यूएई में लगभग 20 लाख से ज्यादा पाकिस्तानी कामगार रहते हैं, जो हर साल अरबों डॉलर की रेमिटेंस अपने देश भेजते हैं। पिछले साल ही यह आंकड़ा 8 अरब डॉलर से अधिक बताया गया था, जिससे पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा व्यवस्था को बड़ा सहारा मिलता है।

इसी बीच, पाकिस्तान और यूएई के बीच वित्तीय तनाव भी बढ़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यूएई ने पाकिस्तान का 3.5 अरब डॉलर का रोल-ओवर कर्ज वापस ले लिया, जिसके चलते पाकिस्तान को अपनी आर्थिक रणनीति में बदलाव करना पड़ा।


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    दूसरी ओर, क्षेत्रीय राजनीति में अमेरिका भी सक्रिय नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यदि ईरान के साथ बातचीत विफल होती है, तो समुद्री सुरक्षा से जुड़े अभियान प्रोजेक्ट फ्रीडम प्लस को और विस्तार दिया जा सकता है।

    कुल मिलाकर, पाकिस्तान की कूटनीतिक चालें अब उसके लिए आर्थिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर नई चुनौतियां खड़ी करती दिख रही हैं, जबकि खाड़ी देशों के साथ उसके रिश्ते पहले से अधिक जटिल होते जा रहे हैं।

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