
नई दिल्ली. अमेरिका (US) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) को बड़ा कानूनी झटका लगा है. वाशिंगटन की एक फेडरल कोर्ट (federal court) ने देश के सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक केंद्रों में से एक ‘जॉन एफ. कैनेडी सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स’ (John F. Kennedy Center for the Performing Arts) यानी कैनेडी सेंटर से राष्ट्रपति ट्रंप का नाम हटाने का आदेश दिया है. अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में साफ कहा है कि अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की मंजूरी के बिना इस संस्थान का नाम नहीं बदला जा सकता.
यूएस डिस्ट्रिक्ट जज क्रिस्टोफर कूपर ने ट्रंप प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे 14 दिनों के भीतर परिसर से डोनाल्ड ट्रंप के नाम वाले सभी साइनबोर्ड हटा दें. इसके साथ ही कोर्ट ने आधिकारिक दस्तावेजों और प्रचार सामग्री में ‘ट्रंप कैनेडी सेंटर’ नाम के इस्तेमाल पर भी तुरंत रोक लगा दी है.
अदालत ने कहा कि कैनेडी सेंटर की कानूनी संरचना स्पष्ट रूप से इसे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की स्मृति में बनाए गए संस्थान के रूप में परिभाषित करती है. ऐसे में इसके नाम में बदलाव का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है.
जज कूपर के आदेश ने ट्रंप प्रशासन की केनेडी सेंटर को बड़े पैमाने पर मरम्मत के लिए दो साल तक बंद रखने की योजना पर भी रोक लगा दी. हालांकि जज ने कहा कि पुरानी हो रही इस इमारत की बेहद जरूरी मरम्मत का काम आगे बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि उनके फैसले का मकसद यह तय करना नहीं है कि सेंटर को कैसे चलाया जाए.
फैसले पर क्या बोले ट्रंप?
कोर्ट के आदेश पर ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने U.S. कॉमर्स डिपार्टमेंट को निर्देश दिया है कि वह कांग्रेस के साथ मिलकर इस संस्थान के पूरे और पूर्ण हस्तांतरण के लिए सभी जरूरी इंतज़ाम करे और इसकी देखरेख, रखरखाव और प्रबंधन की ज़िम्मेदारी सांसदों को सौंप दे.
शुक्रवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर की गई एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि अगले महीने शुरू होने वाली बड़े पैमाने की मरम्मत का काम सेंटर को बंद किए बिना मुमकिन नहीं होगा, और सेंटर को खुला रखने का कूपर का आदेश खतरनाक साबित हो सकता है. ट्रंप ने कहा, ‘मैं ऐसी किसी भी स्थिति का हिस्सा नहीं बन सकता, जहाँ लोगों की सुरक्षा को खुलेआम और साफ़-साफ़ ख़तरे में पड़ने दिया जाए.’
बता दें कि यह मामला डेमोक्रेटिक पार्टी की महिला सांसद जॉयस बीटी द्वारा दायर किया गया था. उन्होंने कैनेडी सेंटर बोर्ड द्वारा नाम बदलने के फैसले की वैधानिकता को कोर्ट में चुनौती दी थी. फिलहाल इस अदालती झटके पर व्हाइट हाउस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.
क्या था पूरा विवाद?
यह विवाद पिछले साल तब शुरू हुआ था जब डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता वाले बोर्ड (जिसमें उनके कई करीबी सहयोगी ट्रस्टी के रूप में शामिल हैं) ने एक प्रस्ताव पास किया था. इस प्रस्ताव के तहत इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक संस्थान का नाम बदलकर ‘डोनाल्ड जे. ट्रंप एंड जॉन एफ. कैनेडी मेमोरियल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स’ करने का फैसला लिया गया था.
प्रस्ताव पास होने के तुरंत बाद, इमारत के मुख्य हिस्से पर जॉन एफ. कैनेडी के नाम के ठीक ऊपर डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिखवा दिया गया था. इस कदम का कैनेडी परिवार के वंशजों और बोर्ड के कुछ अन्य सदस्यों ने कड़ा विरोध किया था और इस फैसले की वैधता पर सवाल उठाए थे.
ऐतिहासिक स्थलों को बदलने की ट्रंप की योजना
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वाशिंगटन के प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का कायाकल्प करने की एक बड़ी योजना पर काम कर रहे हैं, कैनेडी सेंटर का नाम बदलना भी इसी का हिस्सा था. उनकी योजनाओं में इस परिसर में एक 250 फीट ऊंचा स्मारक द्वार और एक 90,000 वर्ग फुट का विशाल बॉलरूम बनाना शामिल है. हालांकि, निर्माण की इन योजनाओं को भी अदालती जांच का सामना करना पड़ रहा है.
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