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सिंगरौली के DMF फंड पर उठा बड़ा सवाल, 1100 करोड़ रुपये दूसरे जिलों को आवंटित करने का आरोप

June 24, 2026

सिंगरौली । मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सिंगरौली (Singrauli) में DMF फंड को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश सचिव राजेश सोनी (Rajesh Soni) ने आरोप लगाया कि पिछले 5 वर्षों में करीब 1100 करोड़ रुपये दूसरे जिलों को आवंटित किए गए। उन्होंने मामले की जांच और जवाबदेही की मांग की है।

राजेश सोनी ने आरोप लगाया है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए मिलने वाली सिंगरौली की DMF राशि का बड़ा हिस्सा अन्य जिलों में स्थानांतरित कर दिया गया, जबकि जिले के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन कर रहे हैं।

सोमवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में राजेश सोनी ने सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में सिंगरौली के DMF फंड से करीब एक हजार करोड़ रुपये प्रदेश के विभिन्न जिलों को हस्तांतरित किए गए। उन्होंने कहा कि यह राशि खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रदूषण नियंत्रण, रोजगार सृजन और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर खर्च की जानी चाहिए थी।


  • खनन का दंश सिंगरौली झेले, विकास का लाभ दूसरे जिलों को?
    राजेश सोनी ने कहा कि सिंगरौली के लोग वर्षों से प्रदूषण, विस्थापन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। चितरंगी, देवसर और अन्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के कई गांवों में आज भी लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं है। जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों तथा आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की कमी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कोयला और फ्लाई ऐश परिवहन के कारण जिले की सड़कें दुर्घटनाओं का केंद्र बन चुकी हैं। आए दिन सड़क हादसों में लोगों की जान जा रही है, लेकिन स्थानीय विकास के लिए निर्धारित निधि दूसरे जिलों में खर्च की जा रही है।

    इन जिलों को भेजी गई राशि
    पत्रकार वार्ता में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार DMF निधि से सीहोर, पन्ना, निवाड़ी, डिंडोरी, सागर, भोपाल, जबलपुर, बालाघाट, खरगोन, मंदसौर, अनूपपुर, आगर मालवा, छिंदवाड़ा, दतिया, दमोह, इंदौर, रायसेन, बड़वानी, टीकमगढ़, नीमच, अशोकनगर, शाजापुर, अलीराजपुर, रीवा और सीधी सहित कई जिलों को करोड़ों रुपये की राशि हस्तांतरित की गई।

    जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल
    राजेश सोनी ने आरोप लगाया कि DMF निधि की मूल अवधारणा खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास से जुड़ी है, लेकिन इसके बावजूद निधि का उपयोग अन्य जिलों में किया गया। उनका कहना है कि यदि यह राशि सिंगरौली में खर्च होती तो जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार के क्षेत्र में बड़े बदलाव संभव थे।

    उन्होंने जिले के जनप्रतिनिधियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सिंगरौली के अधिकारों से जुड़े इतने बड़े मुद्दे पर किसी ने प्रभावी आवाज नहीं उठाई। जनता लगातार अपने प्रतिनिधियों को चुनती रही, लेकिन जिले के हितों की रक्षा के लिए अपेक्षित प्रयास दिखाई नहीं दिए।

    आंदोलन और न्यायालय जाने की चेतावनी
    राजेश सोनी ने मांग की कि सिंगरौली से स्थानांतरित की गई DMF राशि को 15 दिनों के भीतर वापस जिले के खाते में जमा कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर आम नागरिकों, ग्रामीणों, आदिवासियों और युवाओं के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि मामले में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जाएगी, ताकि DMF निधि के उपयोग और हस्तांतरण की वैधानिकता की जांच हो सके। पत्रकार वार्ता में आम आदमी पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष (महिला विंग) अनिता बैस तथा प्रदेश संयुक्त सचिव श्याम सुंदर विश्वकर्मा भी उपस्थित रहे।

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