
टोक्यो। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने अपनी सरकार की कैबिनेट में बड़ा फेरबदल किया है। उन्होंने 18 में से 10 मंत्रियों को हटा दिया है, जबकि अमेरिका के साथ संबंध और देश की अहम नीतियों में निरंतरता बनाए रखने के लिए कई बड़े मंत्रियों को पद पर बरकरार रखा है। यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है जब ताकाइची की लोकप्रियता में कमी आई है और जापान को महंगाई, कमजोर येन, चीन के साथ तनाव और अमेरिका की बढ़ती मांगों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अक्टूबर में प्रधानमंत्री बनने के बाद यह ताकाइची का पहला कैबिनेट फेरबदल है।
ताकाइची जापान की आधुनिक राजनीति में प्रधानमंत्री बनने वाली पहली महिला नेता हैं। शुरुआती महीनों में उनकी लोकप्रियता काफी मजबूत रही और उनके सीधे बोलने के अंदाज ने खासकर युवा मतदाताओं को आकर्षित किया। लेकिन बाद में उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई। उन्होंने शाही परिवार में केवल पुरुषों के उत्तराधिकार से जुड़े नियमों को लागू करने जैसी नीतियों को आगे बढ़ाया, जबकि जनता महंगाई से निपटने के लिए सरकार से कड़े कदमों की उम्मीद कर रही थी। ऐसे में कैबिनेट में बदलाव को पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन संभालने, नीतियों को आगे बढ़ाने और जनता के बीच समर्थन मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
ताकाइची ने 18 में से 10 मंत्रियों को बदला है। जापान इनोवेशन पार्टी से जुड़े हिरोशी नकात्सुका को प्रशासनिक सुधार और बाल नीतियों का मंत्री बनाया गया है। काजुओ याना ने नोरिकाजु सुजुकी की जगह कृषि मंत्री का पद संभाला है। वहीं आंतरिक मामलों के मंत्री योशिमासा हयाशी की जगह हिसायुकी फुजी को जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी नेतृत्व में भी बदलाव हुए हैं, लेकिन ताकाइची ने कुछ प्रभावशाली नेताओं को उनके पदों पर बनाए रखा है। पूर्व प्रधानमंत्री तारो आसो को एलडीपी का उपाध्यक्ष बरकरार रखा गया है। उनके बहनोई शुनिची सुजुकी को महासचिव पद पर बनाए रखा गया है। ताकाइची के प्रतिद्वंद्वी ताकायुकी कोबायाशी भी नीति अनुसंधान परिषद के प्रमुख बने हुए हैं।
ताकाइची ने रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी और विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी को पद पर बरकरार रखा है। दोनों उनकी पार्टी के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं। उनके पद पर बने रहने से सरकार की प्रमुख नीतियों में निरंतरता बनाए रखने और अमेरिका के साथ संबंधों को स्थिर रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। वित्त मंत्री सात्सुकी कटायामा और आर्थिक एवं राजकोषीय नीति मंत्री मिनोरू किउची को भी नहीं बदला गया है। व्यापार मंत्री रयोसेई अकाजावा भी अपने पद पर बने रहेंगे। वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ और निवेश से जुड़ी मांगों पर काम कर चुके हैं। इस तरह ताकाइची ने सरकार में बदलाव के साथ अहम मंत्रालयों में अनुभव और निरंतरता को भी बनाए रखा है।
जापान को अमेरिका की ओर से रक्षा खर्च बढ़ाने, अमेरिका में ज्यादा निवेश करने और कमजोर येन से निपटने के लिए कदम उठाने का दबाव है। ताकाइची सरकार पहले ही रक्षा खर्च को देश के सकल घरेलू उत्पाद के दो प्रतिशत तक बढ़ा चुकी है और 2027 में इसे और बढ़ाना चाहती है। जापान को अमेरिका की ओर से इसे करीब 3.5 प्रतिशत तक बढ़ाने की मांग का सामना करना पड़ सकता है। वहीं चीन के साथ भी जापान के संबंध चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। ताइवान को लेकर ताकाइची की पिछली टिप्पणी के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है और इसका असर उनके आर्थिक संबंधों पर भी पड़ा है। ताकाइची इस महीने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में जाएंगी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ट्रंप की 24 सितंबर को प्रस्तावित बातचीत से पहले ट्रंप से मुलाकात की कोशिश कर रही हैं।
ताकाइची सरकार साल के अंत तक सुरक्षा और रक्षा रणनीति से जुड़े दस्तावेजों में बदलाव करना चाहती है। इसका उद्देश्य चीन, उत्तर कोरिया और रूस से संभावित खतरों से निपटने के लिए जापान की सैन्य क्षमता को मजबूत करना है। जापान युद्ध के बदलते तरीकों के मुताबिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता और लड़ाकू ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। सरकार का मानना है कि आधुनिक युद्ध में इन तकनीकों की भूमिका बढ़ रही है। ओकिनावा के गवर्नर चुनाव में ताकाइची की एलडीपी और अन्य रूढ़िवादी दलों के समर्थन वाले गेंता कोजा की जीत से दक्षिणी द्वीपों में सैन्य क्षमता बढ़ाने की उनकी योजना को भी समर्थन मिलने की उम्मीद है।
महंगाई के दबाव के बीच ताकाइची ने उपभोग कर को दो साल के लिए मौजूदा आठ प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत करने और परिवारों को भुगतान करने की योजना आगे बढ़ाई है। सोमवार को कैबिनेट ने इस कर उपाय को मंजूरी दी थी। हालांकि, योजना के लिए धन की व्यवस्था का पूरा विवरण सामने नहीं होने से उनकी पार्टी के भीतर मतभेद पैदा हुए हैं। अक्टूबर में संसद का सत्र दोबारा शुरू होने पर यह मुद्दा सरकार के लिए चुनौती बन सकता है। ताकाइची की ज्यादा खर्च वाली आर्थिक नीति को लेकर अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी जापान से कमजोर येन और कम ब्याज दरों वाली आर्थिक नीति को रोकने की अपील की है।
ताकाइची के सामने एक साथ कई मोर्चे हैं। एक तरफ उनकी घटती लोकप्रियता को संभालना है, तो दूसरी तरफ पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन बनाए रखना है। इसके अलावा अमेरिका के साथ मजबूत संबंध कायम रखते हुए चीन से तनाव के बीच सुरक्षा नीति को आगे बढ़ाना और महंगाई से राहत देने के लिए आर्थिक फैसले लागू करना भी उनकी प्राथमिकताओं में है। कैबिनेट में 10 नए चेहरों को शामिल करते हुए रक्षा, विदेश, वित्त और व्यापार जैसे अहम मंत्रालयों में पुराने चेहरों को बनाए रखना इसी संतुलन की कोशिश के तौर पर सामने आया है। अब सरकार के सामने चुनौती इन नीतियों को आगे बढ़ाने और अक्टूबर में संसद के अगले सत्र के दौरान अपनी योजनाओं को समर्थन दिलाने की होगी।
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