
नई दिल्ली(New Delhi)। मिडिल ईस्ट(Middle East) में चल रही तनावपूर्ण स्थिति(ongoing tense situation) और शांति प्रयासों के बीच पाकिस्तान की सैन्य रणनीति(major revelation) को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान(Pakistan’s) ने सऊदी अरब(Saudi Arabia) के साथ रक्षा समझौते के तहत लगभग 8000 सैनिकों की तैनाती की है। इस तैनाती में लड़ाकू विमान(fighter jets), ड्रोन स्क्वाड्रन(drone squadrons) और आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली भी शामिल बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार इस तैनाती में मुख्य रूप से चीन के सहयोग से विकसित JF-17 Thunder लड़ाकू विमान शामिल हैं, जिनकी संख्या लगभग 16 बताई जा रही है। इसके अलावा दो ड्रोन स्क्वाड्रन और चीनी मूल की HQ-9 Air Defense System भी तैनात की गई है, जिसका संचालन पाकिस्तानी कर्मियों द्वारा किया जा रहा है।
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि यह पूरी सैन्य व्यवस्था सऊदी अरब के खर्च पर संचालित हो रही है और इसे एक “युद्ध-सक्षम समर्थन बल” के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य किसी बड़े हमले की स्थिति में सऊदी अरब की रक्षा करना है।
सूत्रों के अनुसार यह तैनाती उस समय और बढ़ी है जब पाकिस्तान खुद को क्षेत्रीय शांति वार्ताओं में मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। इसी बीच यह भी दावा किया गया है कि पहले से ही हजारों पाकिस्तानी सैनिक सऊदी अरब में मौजूद हैं और भविष्य में यह संख्या और बढ़ सकती है।
हालांकि अब तक पाकिस्तान और सऊदी अरब दोनों की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम पश्चिम एशिया में बदलते सुरक्षा समीकरणों और क्षेत्रीय तनावों से जुड़ा हो सकता है।
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