
नई दिल्ली। महिला आरक्षण (Women’s Reservation) से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक (Constitutional Amendment Bill) गुरुवार को संसद (Parliament) में पेश किए जाने हैं। इसके साथ ही 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाला विशेष सत्र हंगामेदार रहने के संकेत मिल रहे हैं, क्योंकि विपक्ष इन विधेयकों का विरोध करने की तैयारी में है। विपक्ष का कहना है कि वह महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन परिसीमन प्रक्रिया का विरोध करेगा।
संसद में पास कराने के लिए जरूरी आंकड़ों की चुनौती
संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। ऐसे में एनडीए गठबंधन के पास फिलहाल पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण सरकार को विपक्ष के सहयोग की जरूरत पड़ सकती है।
सीटों में बढ़ोतरी का बड़ा प्रस्ताव
सरकार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के साथ-साथ लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव भी ला रही है। इसके लिए परिसीमन आयोग के गठन से संबंधित विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून में संशोधन भी पेश किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री का संदेश
नरेंद्र मोदी ने विशेष सत्र को लेकर कहा कि देश नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। उन्होंने माताओं और बहनों के सम्मान को राष्ट्र के सम्मान से जोड़ते हुए इस पहल को महत्वपूर्ण बताया।
परिसीमन पर दक्षिण भारत से तीखा विरोध
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने केंद्र के परिसीमन प्रस्ताव को ‘काला कानून’ करार दिया। उनका कहना है कि इससे दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु के लोगों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
विरोध प्रदर्शन में बिल की कॉपी जलाई
स्टालिन ने काले कपड़े पहनकर विरोध जताया और परिसीमन बिल की कॉपी भी जला दी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र ने दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को नजरअंदाज किया, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
2011 की जनगणना क्यों बनी आधार
सरकारी सूत्रों के अनुसार, परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना को आधार इसलिए बनाया गया है ताकि 2029 तक महिला आरक्षण लागू किया जा सके। यदि 2026 की जनगणना का इंतजार किया जाता, तो प्रक्रिया में देरी हो सकती थी।
महिला आरक्षण और परिसीमन का कनेक्शन
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को मिलने वाला 33 प्रतिशत आरक्षण जनगणना और परिसीमन से जुड़ा हुआ है। सरकार इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए नए विधेयक ला रही है।
परिसीमन क्या है और क्यों जरूरी
परिसीमन एक प्रक्रिया है, जिसमें जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय की जाती हैं। इसका उद्देश्य हर क्षेत्र को समान प्रतिनिधित्व देना होता है। देश में यह प्रक्रिया अब तक कई बार हो चुकी है और वर्तमान कवायद को इसका अगला चरण माना जा रहा है।
कौन करेगा विधेयक पेश
लोकसभा में ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ और ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ को केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पेश करेंगे, जबकि केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में रखेंगे।
आरक्षण का दायरा और बढ़ेगा
इस प्रस्ताव के तहत अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह व्यवस्था सामान्य और आरक्षित दोनों श्रेणियों में लागू होगी।
विपक्ष की रणनीति तैयार
INDIA गठबंधन ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए परिसीमन विधेयक का विरोध करने का फैसला लिया है। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच बैठकें भी हो चुकी हैं और संसद में इस पर तीखी बहस होने की संभावना है।
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