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धरमपुरा में बनेगा मेगा इंडस्ट्रियल हब…700 एकड़ जमीन पर दावेदारी

June 18, 2026

  • केंद्र की ‘भव्य’ योजना के तहत विश्वस्तरीय प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क का प्रस्ताव, हजारों रोजगार और करोड़ों के निवेश की उम्मीद

जबलपुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) के तहत विकसित किए जाने वाले विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क के लिए जबलपुर ने मजबूत दावेदारी पेश की है। भेड़ाघाट के समीप स्थित ग्राम धरमपुरा में 700 एकड़ से अधिक भूमि उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित औद्योगिक पार्क में 400 से 500 करोड़ रुपये तक का निवेश करने वाले बड़े उद्योग स्थापित हो सकेंगे, जिससे महाकौशल क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने के साथ हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
केंद्र सरकार देशभर में आधुनिक सुविधाओं से लैस 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित करने जा रही है। इसी योजना के तहत जबलपुर का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र को भेजा जाएगा। यदि परियोजना को मंजूरी मिलती है तो यह जबलपुर के औद्योगिक इतिहास का सबसे बड़ा निवेश केंद्र बन सकता है।


  • 506 एकड़ भूमि तैयार, 222 एकड़ और जोडऩे की कवायद
    मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमपीआईडीसी) ने धरमपुरा क्षेत्र की 506 एकड़ भूमि का चयन कर लिया है। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का कार्य भी शुरू हो चुका है। इसके साथ ही आसपास की 222 एकड़ अतिरिक्त भूमि को शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है। भूमि उपलब्ध होने के बाद एक ही स्थान पर 700 एकड़ से अधिक का विशाल औद्योगिक परिसर विकसित किया जा सकेगा।

    उद्योगों को मिलेगा रेडी-टू-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर
    प्रस्तावित पार्क की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि उद्योगों को यहां पहले से तैयार आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। बिजली, पानी, सड़क, इंटरनेट, औद्योगिक शेड और अन्य आवश्यक सुविधाएं पहले से मौजूद रहेंगी। इससे उद्योगों को उत्पादन शुरू करने के लिए अतिरिक्त समय और लागत खर्च नहीं करनी पड़ेगी।

    गारमेंट, फूड और मल्टी प्रोडक्ट पार्क का प्रस्ताव
    जबलपुर की औद्योगिक और कृषि क्षमता को देखते हुए डीपीआर में गारमेंट पार्क, फूड पार्क और मल्टी प्रोडक्ट इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने का प्रस्ताव शामिल किया गया है। जबलपुर पहले से ही प्रदेश का एक बड़ा गारमेंट हब माना जाता है, जहां लगभग 800 गारमेंट निर्माण इकाइयां संचालित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टेक्सटाइल उद्योग और कच्चे माल की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित हो जाए तो यह क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकता है।वहीं जिले में कृषि उत्पादन की प्रचुरता फूड प्रोसेसिंग उद्योग के लिए मजबूत आधार तैयार करती है। जिले में हर वर्ष लगभग 10-10 लाख मीट्रिक टन गेहूं और धान, 7 लाख मीट्रिक टन सब्जियां, 4 लाख मीट्रिक टन मटर तथा 90 हजार मीट्रिक टन सिंघाड़ा उत्पादन होता है।

    आधुनिक सुविधाओंस लैस होगा पार्क
    प्रस्तावित औद्योगिक परिसर में आधुनिक सड़क नेटवर्क, जल निकासी व्यवस्था, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित सेवाएं, कारखाना शेड, परीक्षण प्रयोगशालाएं, वेयरहाउस और भंडारण केंद्र विकसित किए जाएंगे। श्रमिकों के लिए आवासीय सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा बाहरी कनेक्टिविटी अवसंरचना विकसित करने के लिए परियोजना लागत का 25 प्रतिशत तक अतिरिक्त वित्तीय सहयोग भी प्रदान किया जाएगा।

    हजारों करोड़ का निवेश और 3 हजार रोजगार की संभावना
    वर्तमान में जिले में चार औद्योगिक क्षेत्र संचालित हैं, लेकिन बड़े निवेश वाले उद्योगों की संख्या सीमित है। प्रस्तावित औद्योगिक पार्क से उद्योगों के लिए बेहतर ईको-सिस्टम विकसित होगा और निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।विशेषज्ञों का अनुमान है कि परियोजना को स्वीकृति मिलने पर हजारों करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हो सकता है और करीब तीन हजार प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही सहायक और लघु उद्योगों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

    एमपीआईडीसी ने शुरू की प्रक्रिया
    भारत औद्योगिक विकास योजना के तहत जबलपुर में विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। धरमपुरा में 506 एकड़ भूमि उपलब्ध है तथा अतिरिक्त 222 एकड़ भूमि के आवंटन के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेजा जा रहा है। परियोजना की डीपीआर तैयार करने का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। यदि यह परियोजना मंजूर होती है तो जबलपुर न केवल महाकौशल बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल हो सकता है।

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