
नई दिल्ली/वायनाड । राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने आरोप लगाया कि मोदी और शाह (Modi and Shah)ने ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) को मैच फिक्सिंग की जिम्मेदारी दी (Entrusted with responsibility of ‘Match-fixing’) ।
निर्वाचन आयोग के कामकाज और निष्पक्षता को लेकर केंद्र सरकार तथा विपक्षी दलों के बीच छिड़ा सियासी घमासान और तीखा हो गया है। केरल के पूर्व मुख्य सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जिजी थॉमसन के एक सनसनीखेज खुलासे के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोला है, वहीं, केरल के वायनाड दौरे पर पहुंचीं कांग्रेस महासचिव व सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त के तत्काल इस्तीफे और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कड़ा रुख अपनाते हुए ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति और उनकी भूमिका को कटघरे में खड़ा किया। राहुल गांधी ने लिखा कि “पहले ज्ञानेश कुमार का इस्तेमाल बीजेपी के लिए लोगों की भर्ती करने में किया गया। फिर मोदी और शाह ने उन्हें अंपायर बना दिया और भारत के चुनावों में मैच फिक्सिंग की ज़िम्मेदारी सौंप दी।” राहुल गांधी का यह बयान केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के उस साक्षात्कार के बाद आया है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2016 में (जब दोनों अधिकारी सेवा में थे) दिल्ली जाने वाली एक उड़ान के दौरान ज्ञानेश कुमार ने उनसे मुलाकात की थी। थॉमसन के अनुसार, ज्ञानेश कुमार ने उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव बीजेपी के टिकट पर लड़ने की सलाह दी थी और कहा था कि सांसद बनने के बाद उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने का अवसर भी मिल सकता है। हालांकि, थॉमसन ने इस चुनावी प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।
वायनाड में मीडिया से बात करते हुए प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जो खुलासे हो रहे हैं, वे सीधे तौर पर संविधान और लोकतंत्र पर हमला हैं। प्रियंका गांधी ने कहा, “हमारी स्पष्ट और तत्काल मांग है कि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें। इस मुद्दे पर पूरा इंडिया गठबंधन पूरी तरह एकजुट है।” उन्होंने कहा कि कथित गैरकानूनी गतिविधियों के मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त को मिली कानूनी सुरक्षा (इम्युनिटी) समाप्त होनी चाहिए। यदि यह साबित होता है कि उन्होंने चुनावी प्रक्रिया के उल्लंघन की जानबूझकर अनुमति दी, तो उनके खिलाफ बाकायदा आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए। उन्होंने मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने संबंधी रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए इसे लोकतंत्र के खिलाफ गंभीर आपराधिक कृत्य करार दिया और आरोप लगाया कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व मुख्य चुनाव आयुक्त का बचाव कर रहा है।
कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने ज्ञानेश कुमार पर हमला तेज करते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि वे केरल कैडर के अधिकारी रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस संस्थागत पतन के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ेगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की केरल मौजूदगी का जिक्र करते हुए वेणुगोपाल ने सवाल किया कि जब देश के लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली पर इतने गंभीर सवाल उठ रहे हैं, तब केंद्र सरकार और गृह मंत्री पूरी तरह खामोश क्यों हैं? केंद्र को देश की जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग का कहना है कि संस्थागत विचार-विमर्श के दौरान चुनाव आयुक्तों के बीच अलग-अलग टिप्पणियां या असहमति सामने आना एक सामान्य प्रशासनिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। आयोग ने आंतरिक कलह की बात को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि एसआईआर और मतदाता सूची सहित आयोग के सभी अंतिम निर्णय पूरी तरह सर्वसम्मति से लिए गए हैं। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और साख पर ही देश के लोकतंत्र का भविष्य निर्भर है।
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