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आग के दरिया में कूद पड़े मोहल्ले के युवक, जलते होटल से दर्जनों लोगों को बचाकर बने ‘रियल हीरो’

June 04, 2026

नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली (South Delhi) के मालवीय नगर स्थित एक होटल में लगी भीषण आग (Heavy fire at the hotel) ने जहां कई परिवारों को गहरे जख्म दिए, वहीं इस भयावह हादसे के बीच कुछ स्थानीय युवाओं की बहादुरी इंसानियत की मिसाल बनकर सामने आई। धुएं और आग की लपटों से घिरे होटल के भीतर जब लोग मदद के लिए चीख रहे थे, तब मोहल्ले के कुछ युवाओं ने अपनी जान की परवाह किए बिना राहत अभियान शुरू कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दमकल विभाग और राहत एजेंसियों के पहुंचने से पहले ही स्थानीय लड़के बचाव में जुट गए थे। किसी ने होटल तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां लगाईं, किसी ने धुएं से घिरे लोगों को कंधों का सहारा देकर बाहर निकाला, जबकि कुछ घायल और बेहोश लोगों को सड़क पर प्राथमिक मदद देने में लग गए।


  • धुएं और लपटों के बीच शुरू हुआ रेस्क्यू
    होटल की खिड़कियों से निकलती आग और अंदर फंसे लोगों की चीखों ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी। इसी दौरान असरार खान, वकार, मोहम्मद अफजल, मोहम्मद शोएब खान, वसीम राजा और उनके साथियों ने हालात की गंभीरता को देखते हुए खुद मोर्चा संभाल लिया।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक, युवाओं ने आसपास के घरों और दुकानों से गद्दे, कंबल और चादरें इकट्ठी कीं और होटल के नीचे बिछा दीं, ताकि ऊपर से कूदने वाले लोगों को गंभीर चोट से बचाया जा सके।

    तीसरी-चौथी मंजिल से लोगों ने लगाई छलांग
    प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग और धुएं से घबराए कई लोग तीसरी और चौथी मंजिल से नीचे कूदने को मजबूर हो गए। नीचे मौजूद युवाओं ने लगातार गद्दों की स्थिति बदलकर गिरने वालों को संभालने की कोशिश की।

    स्थानीय युवक वकार ने बताया कि ऊपर फंसे लोग घबराहट में थे और धुएं की वजह से कुछ देख नहीं पा रहे थे। ऐसे में नीचे से लगातार उन्हें आवाज लगाकर हिम्मत दी गई और सुरक्षित बाहर निकलने के विकल्प बताए गए।

    ‘किसी को अपनी जान की परवाह नहीं थी’
    हादसे की प्रत्यक्षदर्शी शबीना खान ने बताया कि उस समय वहां मौजूद लोगों की एक ही कोशिश थी—जितनी ज्यादा जिंदगियां बचाई जा सकें, बचाई जाएं। उनके मुताबिक, किसी ने यह नहीं सोचा कि खुद की जान खतरे में पड़ सकती है।


  • स्थानीय लोगों का दावा है कि इन युवाओं की तत्परता से करीब 30 से 40 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद मिली। अगर शुरुआती मिनटों में उन्होंने पहल न की होती, तो नुकसान और ज्यादा गंभीर हो सकता था।

    21 लोगों की मौत वाले इस दर्दनाक हादसे के बीच मोहल्ले के इन युवाओं का साहस अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि संकट की उस घड़ी में उन्होंने किसी पहचान या डर की परवाह किए बिना इंसानियत का फर्ज निभाया।

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