नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों और विपक्ष के हमलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली (Examination System) को लेकर बड़ा संदेश दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने कहा कि केंद्र सरकार पेपर लीक जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए सख्त कानून लाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत फास्ट-ट्रैक कोर्ट और दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। इस मसौदे पर केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में चर्चा होगी।
हालांकि, छात्रों और विपक्ष की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग लगातार उठाई जा रही है, लेकिन प्रधानमंत्री के बयान में मंत्रिमंडल में किसी बदलाव या इस्तीफे को लेकर कोई संकेत नहीं दिया गया।
करीब तीन मिनट के वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पेपर लीक कोई सामान्य घटना नहीं है। इससे लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों को मानसिक पीड़ा हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कथित पेपर लीक सामने आने के बाद सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि छात्रों का एक शैक्षणिक वर्ष खराब न हो। इसी उद्देश्य से कम समय में दोबारा परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें करीब 22 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि परीक्षा के परिणाम 19 जुलाई को घोषित किए गए और सफल छात्र अब अपने अगले शैक्षणिक चरण की तैयारी कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने बताया कि जांच एजेंसियां पहले से ही कार्रवाई कर रही हैं और मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। लेकिन सरकार केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहती।
उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों को ऐसा कानून तैयार करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें पेपर लीक के मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में हो और दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया जाए। अधिकारियों ने मसौदा तैयार कर सरकार को सौंप दिया है, जिस पर कैबिनेट में चर्चा के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।
NEET पेपर लीक मामले को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्र संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर समेत विभिन्न शहरों में आंदोलन जारी है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
विपक्ष का कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री जिम्मेदारी लेते हुए पद नहीं छोड़ते, तब तक इस मुद्दे पर सरकार की जवाबदेही तय नहीं मानी जा सकती। वहीं, सरकार की ओर से फिलहाल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा या संकेत सामने नहीं आया है।
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