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NEET परीक्षा में उम्र और प्रयासों की सीमा तय करने की तैयारी, संसदीय समिति ने की सिफारिश

October 10, 2026

नई दिल्ली:राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक (NEET UG) में अधिकतम आयु सीमा (Maximum Age Limit) और प्रयासों की संख्या तय करने पर फिर विचार किया जा सकता है। शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee) ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा सहित प्रमुख परीक्षाओं के लिए उम्र और प्रयासों की उचित सीमा निर्धारित करने की संभावनाओं पर विचार करने की सिफारिश की है। फिलहाल NEET UG में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों पर अधिकतम आयु की पाबंदी नहीं है और परीक्षा में बैठने के प्रयासों की संख्या भी निर्धारित नहीं है। इसके चलते 70 वर्ष से अधिक उम्र के उम्मीदवार भी परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। वर्ष 2026 की NEET UG परीक्षा में 71 वर्षीय अशोक बहारा के शामिल होने का मामला भी सामने आया था। समिति ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency) में सुधारों से जुड़ी अपनी 382वीं रिपोर्ट शुक्रवार को पेश की। समिति के प्रमुख राज्यसभा में कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक(Mukul Wasnik ) हैं।

समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, उसे बताया गया कि NEET UG में उम्मीदवार कितनी भी बार परीक्षा दे सकते हैं और उनके लिए कोई ऊपरी आयु सीमा भी लागू नहीं है। पैनल ने शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर NEET UG सहित सभी प्रमुख परीक्षाओं के लिए उम्र और प्रयासों की उचित सीमा तय करने की संभावनाओं पर विचार करने की सिफारिश की है। हालांकि, यह सिफारिश सीमा तत्काल लागू करने का फैसला नहीं है, बल्कि संबंधित मंत्रालयों और पक्षों के साथ इसकी संभावनाओं पर विचार करने से जुड़ी है। रिपोर्ट में परीक्षा व्यवस्था में सुधार के दूसरे उपायों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें परीक्षा के तरीके में बदलाव, सरकारी केंद्रों का विकास और परीक्षा एजेंसी की जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल है।

NEET में पहले भी उम्र और प्रयासों की सीमा लागू की जा चुकी है। वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने परीक्षा में अधिकतम तीन बार शामिल होने की सीमा तय की थी। इसके साथ ही सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए ऊपरी आयु सीमा 25 वर्ष और आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए 30 वर्ष रखी गई थी। हालांकि, उसी वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने आयु सीमा के मामले में हस्तक्षेप किया। इसके बाद अदालत में कार्यवाही लंबित रहने के दौरान 25 वर्ष और उससे अधिक उम्र के उम्मीदवारों को NEET UG 2019 के लिए अस्थायी रूप से आवेदन करने की अनुमति दी गई। बाद में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मार्च 2022 में अधिकतम आयु सीमा हटा दी। वर्तमान व्यवस्था में NEET UG के लिए अधिकतम आयु और प्रयासों की कोई निर्धारित सीमा नहीं है। इसके विपरीत, JEE Advanced में आयु से संबंधित पात्रता शर्तें लागू हैं और उम्मीदवार लगातार दो वर्षों में अधिकतम दो बार परीक्षा दे सकते हैं।

संसदीय समिति ने NEET UG को कलम-कागज के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT मोड में आयोजित करने का सुझाव भी दिया है। पैनल के अनुसार, इस बदलाव के लिए परीक्षा केंद्रों का संचालन केंद्र या राज्य सरकारों के स्वामित्व वाले और उनके द्वारा संचालित केंद्रों के माध्यम से किया जाना चाहिए। समिति ने कहा कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा की व्यवस्था लागू करने से पहले सुरक्षित सरकारी बुनियादी ढांचे में निवेश करना जरूरी है। इसमें खास तौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों पर ध्यान देने की बात कही गई है। समिति का सुझाव है कि परीक्षा व्यवस्था में बदलाव करते समय उम्मीदवारों की सुविधा और परीक्षा तक उनकी पहुंच को प्राथमिकता दी जाए, ताकि क्षेत्रीय असमानताओं के कारण किसी विद्यार्थी को नुकसान न उठाना पड़े।

पैनल ने परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाने और प्रत्येक जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र स्थापित करने की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले विद्यार्थियों की परेशानी कम करना तथा यात्रा और ठहरने पर होने वाले खर्च को घटाना है। समिति ने NEET UG प्रश्नपत्र लीक और परीक्षाएं रद्द होने जैसी घटनाओं के मद्देनजर NTA की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विधायी तंत्र बनाने का सुझाव भी दिया है। इसके तहत एजेंसी की संसद के दोनों सदनों के प्रति जवाबदेही तय करने पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट में परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखने को सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय अखंडता से जुड़ा विषय बताया गया है।


  • समिति ने प्रश्न बैंक का व्यापक विस्तार करने की सिफारिश भी की है। पैनल के अनुसार, प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं से लंबे समय तक बचाव के लिए प्रश्न बैंकों में निवेश करना व्यावहारिक उपाय हो सकता है। एक ही प्रश्न समूह का बार-बार इस्तेमाल करना या हर साल परीक्षकों से नए प्रश्नपत्र तैयार करवाना परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। इसके अलावा, समिति ने परीक्षा केंद्रों पर देर से पहुंचने वाले विद्यार्थियों को लिखित वचन देने के बाद परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का सुझाव दिया है। इन सिफारिशों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक भरोसेमंद बनाना, उम्मीदवारों की पहुंच बेहतर करना और NTA की कार्यप्रणाली में सुधार की संभावनाओं पर ध्यान देना है।

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