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MP सरकार आज से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में पेश करेगी UCC बिल… कैबिनेट ने दी मंजूरी

July 20, 2026

भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) की कैबिनेट (cabinet) ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) (Uniform Civil Code -UCC) के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी। इसे अब आज 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा। राजधानी भोपाल के बाहरी इलाके में स्थित जगदीशपुर में आयोजित कैबिनेट की स्पेशल मीटिंग में यूसीसी लागू करने संबंधी बिल पर मुहर लगाई गई। जगदीशपुर को पहले इस्लामपुर के नाम से जाना जाता था।

आदिवासियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया
कैबिनेट की बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे नारी सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि आदिवासी समुदाय को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा कि बिल का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित कमेटी के समक्ष करीब 80 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं ने जबकि 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने इस बिल का समर्थन किया।


  • सीएम ने सभी राजनीतिक दलों से सामाजिक समरसता, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय एकता की मजबूती की लिए जा रहे इस विधेयक का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन देने का आह्वान किया।

    कमेटी के सामने पेश नहीं हुई कांग्रेस
    उन्होंने कहा कि कमेटी के समक्ष भारतीय जनता पार्टी, आम आदमी पार्टी और वामपंथी दलों ने अपना पक्ष रखे, लेकिन हर विषय को हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक के नजरिये से देखने वाली कांग्रेस इससे दूर रही। उन्होंने कहा कि बिल में विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, गोद लेने, सरोगेसी और एआरटी (टेस्ट ट्यूब बेबी) से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा दिए जाने का प्रावधान है।

    रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें अनुसूचित जनजातियों (आदिवासियों) को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की गई है।

    5 दिवसीय विधानसभा सत्र आज से
    सीएम ने कहा कि इस विधेयक को विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा। मध्य प्रदेश विधानसभा का 5 दिवसीय मॉनसून सत्र 20 जुलाई से आरंभ होगा।

    तीन भागों में तैयारी की गई रिपोर्ट
    कमेटी की रिपोर्ट तीन भागों में तैयार की गई है। पहले भाग में कमेटी की सिफारिशें हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रचलित कानूनों तथा परंपराओं का विश्लेषण कर सुझाव दिए गए हैं। इस भाग में 10 अध्याय शामिल हैं।

    दूसरे भाग में प्रस्तावित विधेयक का प्रारूप दिया गया है, जिसे मध्य प्रदेश में लागू कानूनों और नियमों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। प्रस्तावित विधेयक में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं।

    तीसरे भाग में जन-परामर्श रिपोर्ट है, जिसमें जिला, राज्य और वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त सुझावों का विस्तृत विवरण दिया गया है। कमेटी को 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जिनका प्रश्नवार, लैंगिक पहचान के हिसाब से अलग-अलग और समुदायवार विश्लेषण भी इसमें शामिल किया गया है। कमेटी ने अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है।

    राज्य सरकार ने कमेटी को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और सहजीवन (लिव-इन संबंध) जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विषयों से संबंधित प्रचलित व्यवस्थाओं का अध्ययन कर मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप विधेयक का प्रारूप तैयार करने का दायित्व सौंपा था।

    कमेटी ने अपनी सिफारिशें तैयार करते समय लैंगिक समानता सुनिश्चित करने, विविध धार्मिक एवं पारंपरिक अनुष्ठानों को अप्रभावित रखने, प्रचलित रीति-रिवाजों का सम्मान करने तथा संवैधानिक प्रावधानों और लोकनीति के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने को आधार बनाया है।

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