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MP: खंडवा में पटवारी का बड़ा कारनामा…. अपने और पत्नी के नाम करा लीं गांव की 51 जमीनें!

September 26, 2026

खंडवा। 17 सितंबर से मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में ‘स्वामित्व भू-अधिकार निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ (‘Swamitva Land Rights Execution and Registration Scheme-2026’) लागू हुई है, जिसका मकसद ग्रामीण आबादी को निशुल्क रजिस्ट्री और भू-अधिकार दिलाना है. मध्य प्रदेश के खंडवा जिले (Khandwa district) से जो खबर आई है, उसने प्रशासनिक तंत्र की नीयत और निष्ठा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस पटवारी के कंधों पर ग्रामीणों की जमीन का रिकॉर्ड सहेजने की जिम्मेदारी थी, उसी ने पद का बेजा इस्तेमाल करते हुए सरकारी चबूतरों, सार्वजनिक बावड़ियों और गरीबों के मकानों के पट्टे अपने और अपनी पत्नी के नाम लिखवा लिए. एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 51 पट्टे।

यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के ग्राम कोलगांव का है. सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्वामित्व योजना’ के तहत गांव में कुल 935 आवासीय पट्टे जारी किए जाने थे. ग्रामीणों को आस थी कि बरसों से जिस जमीन पर वे रह रहे हैं, उसका मालिकाना हक उन्हें मिलेगा. लेकिन योजना के क्रियान्वयन से पहले ही तत्कालीन पटवारी राजेश मंडलोई ने सरकारी रिकॉर्ड में गड़बड़ी की।


  • पटवारी राजेश मंडलोई ने गांव के रिकॉर्ड में हेरफेर कर अपने नाम 48 और अपनी पत्नी मनीषा मंडलोई के नाम 3 पट्टे दर्ज करा लिए. यानी गांव के कुल पट्टों में से 51 पट्टे अकेले पटवारी के परिवार के नाम दर्ज हो गए।

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    इस पूरे मामले का पर्दाफाश तब हुआ, जब ग्रामीण शुभम तोमर ने इसकी शिकायत की और कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तम पाल सिंह ने दस्तावेजों के साथ पूरे मामले को सामने रखा. ग्रामीणों के मुताबिक, दो-तीन साल पहले पटवारी राजेश मंडलोई सर्वे के नाम पर रिकॉर्ड दुरुस्त करने आए थे. लेकिन उन्होंने चुपके से सार्वजनिक और निजी संपत्तियों पर अपना नाम चढ़ा दिया।

    जिला कांग्रेस अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह ने आरोप लगाया कि शुभम तोमर के घर के पीछे स्थित सार्वजनिक बावड़ी, जिससे पूरा गांव पानी पीता है, उसे पटवारी ने अपने नाम कर लिया. हद तो तब हो गई, जब गांव के बस स्टैंड पर बना RCC का सार्वजनिक चबूतरा और ग्रामीण बलिराम का मकान यानी खसरा नंबर 530 भी पटवारी के रिकॉर्ड में दर्ज पाया गया. जिला कांग्रेस अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह ने जब इस मामले की शिकायत कलेक्टर से की तो उन्होंने भी इसे देखकर गंभीरता से लिया।

    शासन ने ‘स्वामित्व योजना’ के तहत पटवारियों को जमीन की रजिस्ट्री करने के अधिकार दिए हैं. कोलगांव पंचायत में पूर्व पटवारी ने 51 पट्टे अपने और अपने परिवार के नाम करा लिए हैं. यह योजना शुरू होने के पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है. यह सिर्फ एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे जिले और प्रदेश में भी कई मामले हो सकते हैं. तत्काल इसकी जांच कमेटी बनाकर जांच की जाए, इससे और भी कई मामले उजागर हो सकते हैं. इससे वाजिब लोग अपने हक से वंचित हो रहे हैं. दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

    मामला उजागर होते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्तमान पटवारी राकेश पटेल को मौके पर भेजकर स्थलीय जांच कराई गई. ग्रामीणों की मौजूदगी में जब खसरों का मिलान हुआ, तो गड़बड़ी की पुष्टि हुई।

    जांच रिपोर्ट सामने आते ही खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने सख्त रुख अपनाया और आरोपी पटवारी राजेश मंडलोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. इसके साथ ही कोलगांव के सभी 935 खसरों और पट्टों की दोबारा जांच कर रिकॉर्ड को तुरंत दुरुस्त करने के आदेश दिए गए हैं।

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