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N Chadrasekaran ने टाटा सन्स के चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा

August 12, 2026

डेस्क। भारत के सबसे प्रतिष्ठित कारोबारी समूहों में शामिल टाटा ग्रुप में बड़ा नेतृत्व बदलाव होने जा रहा है। टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा। वह अपने मौजूदा कार्यकाल के खत्म होने तक यानी फरवरी 2027 तक चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। उनके इस्तीफे के बाद अब टाटा ग्रुप में नए चेयरमैन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

एन चंद्रशेखरन ने जनवरी 2017 में टाटा सन्स की कमान संभाली थी। इससे पहले वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के CEO रह चुके हैं। उनके नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने पिछले करीब एक दशक में कई नए सेक्टर में तेजी से विस्तार किया। एयरलाइंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, डिजिटल कारोबार और डिफेंस जैसे सेक्टर में ग्रुप ने बड़े निवेश किए। उनके कार्यकाल में एयर इंडिया का अधिग्रहण भी टाटा ग्रुप के सबसे बड़े फैसलों में से एक रहा।


  • एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब टाटा सन्स की 18 अगस्त को वार्षिक आम बैठक (AGM) होने वाली है। इस बैठक में उनके डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्त किए जाने पर विचार होना था। चूंकि उनका चेयरमैन पद टाटा सन्स के बोर्ड में उनकी सदस्यता से जुड़ा है, इसलिए यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। फिलहाल टाटा ग्रुप ने उनके उत्तराधिकारी के नाम का ऐलान नहीं किया है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि फरवरी 2027 के बाद टाटा सन्स की कमान किसके हाथ में जाएगी?

    एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर पिछले कुछ समय से टाटा सन्स और टाटा ट्रस्ट के बीच मतभेदों की खबरें भी सामने आती रही हैं। दोनों पक्षों के बीच ग्रुप की रणनीति, नए कारोबार में निवेश, पूंजी की जरूरत और टाटा सन्स की भविष्य की दिशा जैसे मुद्दों पर अलग-अलग राय होने की चर्चा रही है। टाटा सन्स में टाटा ट्रस्ट की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसे में चेयरमैन के भविष्य को लेकर ट्रस्ट की भूमिका काफी अहम मानी जाती है।

    रणनीतिके नेतृत्व में टाटा सन्स के वित्तीय प्रदर्शन में भी मजबूती आई। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का स्टैंडअलोन मुनाफा 21.8 फीसदी बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये हो गया। वहीं कंपनी का रेवेन्यू 9.1 फीसदी बढ़कर 42,366.55 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, एयर इंडिया समेत ग्रुप के कुछ नए कारोबारों में भारी निवेश के कारण घाटा भी बढ़ा है। इसके बावजूद चंद्रशेखरन ने इन निवेशों को लंबे समय के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम बताया है।

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