
नई दिल्ली ।भारतीय जेवलिन स्टार Neeraj Chopra ने लगभग नौ महीने बाद प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स (Competitive Athletics) में वापसी करते हुए Doha Diamond League में चुनौतीपूर्ण प्रदर्शन किया। हालांकि वह पदक जीतने से चूक गए और चौथे स्थान पर रहे, लेकिन उनके प्रदर्शन में भविष्य (Future) के लिए कई सकारात्मक संकेत दिखाई दिए। नीरज ने 85.69 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर Commonwealth Games 2026 के लिए आवश्यक क्वालिफिकेशन मानक (Qualification Standard) हासिल कर लिया, जिससे आगामी बड़े टूर्नामेंट के लिए उनकी दावेदारी और मजबूत हो गई है।
मुकाबले की शुरुआत भारतीय स्टार के लिए उम्मीद के अनुरूप नहीं रही। पहला प्रयास फाउल होने के कारण वह शुरुआती चरण में दबाव में आ गए। हालांकि अनुभवी खिलाड़ी होने का परिचय देते हुए उन्होंने दूसरे प्रयास में 82.77 मीटर का थ्रो किया और प्रतियोगिता में वापसी के संकेत दिए। इसके बाद तीसरे प्रयास में 85.69 मीटर की दूरी हासिल कर उन्होंने खुद को पदक की दौड़ में शामिल कर लिया।
तीसरे प्रयास के बाद ऐसा लग रहा था कि नीरज अंतिम चरण तक पहुंचकर पदक के लिए मजबूत चुनौती पेश कर सकते हैं। लेकिन आगे के प्रयासों में वह अपने प्रदर्शन को बेहतर नहीं बना सके। चौथे प्रयास में उन्होंने 83.45 मीटर का थ्रो किया, जबकि पांचवां प्रयास फाउल रहा। यही दो प्रयास अंततः उनके लिए निर्णायक साबित हुए और वह शीर्ष तीन खिलाड़ियों में जगह बनाने से चूक गए।
प्रतियोगिता का सबसे शानदार प्रदर्शन श्रीलंका के युवा खिलाड़ी रुमेश पथिरागे ने किया। उन्होंने पूरे मुकाबले में निरंतरता दिखाई और चौथे प्रयास में 88.68 मीटर का शानदार थ्रो कर बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद कोई भी खिलाड़ी उनके प्रदर्शन को पीछे नहीं छोड़ सका और उन्होंने खिताब अपने नाम कर लिया। उनके इस प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय जेवलिन सर्किट में उनकी बढ़ती पहचान को और मजबूत किया है।
दूसरे और तीसरे स्थान के लिए भी कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। शीर्ष तीन खिलाड़ियों ने लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए पोडियम पर अपनी जगह सुनिश्चित की, जबकि नीरज बहुत मामूली अंतर से पदक से दूर रह गए। यह अंतर दर्शाता है कि प्रतियोगिता का स्तर कितना ऊंचा था और हर प्रयास का महत्व कितना अधिक था।
हालांकि पदक नहीं जीत पाना नीरज और उनके प्रशंसकों के लिए निराशाजनक रहा, लेकिन लंबे अंतराल के बाद उनकी वापसी को सकारात्मक दृष्टि से देखा जा रहा है। किसी भी एथलीट के लिए चोट या ब्रेक के बाद लय हासिल करना आसान नहीं होता, फिर भी नीरज ने 85 मीटर से अधिक का थ्रो कर यह साबित किया कि वह अभी भी विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि उन्होंने राष्ट्रमंडल खेल 2026 के लिए निर्धारित क्वालिफिकेशन मानक को पार कर लिया। इससे आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनकी भागीदारी की राह आसान हो गई है। भारतीय एथलेटिक्स के लिए यह भी उत्साहजनक संकेत है कि उसका सबसे बड़ा स्टार धीरे-धीरे अपनी सर्वश्रेष्ठ लय की ओर लौटता दिखाई दे रहा है।
दोहा में मिला यह परिणाम भले ही पदक में नहीं बदल सका, लेकिन नीरज चोपड़ा के लिए यह वापसी आत्मविश्वास बढ़ाने वाली साबित हो सकती है। आने वाले महीनों में अधिक प्रतियोगिताओं और निरंतर अभ्यास के साथ उनसे और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। भारतीय खेल प्रेमियों की नजरें अब उनके अगले टूर्नामेंट पर होंगी, जहां वह एक बार फिर पोडियम पर जगह बनाने की कोशिश करते दिखाई देंगे।
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